नाम को लेकर कोर्ट में जंग
दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस ज्योति सिंह ने Dr. Reddy's Laboratories से कहा है कि वह 'Olymviq' ब्रांड नाम के तहत अपने डायबिटीज ड्रग की बिक्री और मार्केट एक्सपेंशन को फिलहाल रोक दे। Novo Nordisk का आरोप है कि 'Olymviq' का उच्चारण Novo Nordisk के 'Ozempic' से काफी मिलता-जुलता है, जिससे मरीजों में कन्फ्यूजन हो सकता है और यह पब्लिक हेल्थ के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। कोर्ट ने Dr. Reddy's को सुझाव दिया है कि वह कन्फ्यूजन से बचने के लिए अपने दूसरे ब्रांड 'Obeda' का इस्तेमाल करने पर विचार करे। इस मामले में अगली सुनवाई 27 मार्च को होनी है, जहां अंतरिम स्टे (interim injunction) का आदेश भी आ सकता है।
जेनेरिक दवाएं और प्राइस वॉर
Dr. Reddy's, भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल (DCGI) से जेनेरिक सेमाग्लूटाइड (semaglutide) के लिए अप्रूवल पाने वाली पहली भारतीय कंपनियों में से एक है। कंपनी ने 21 मार्च 2026 को अपना 'Obeda' इंजेक्शन लॉन्च किया था, जिसकी 2mg और 4mg डोज़ की कीमत लगभग ₹4,200 प्रति माह है। यह Novo Nordisk के Ozempic के मुकाबले करीब 62% सस्ता है।
Novo Nordisk के पेटेंट एक्सपायरी के बाद, भारत में 40 से अधिक फार्मा कंपनियां 50 से अधिक जेनेरिक सेमाग्लूटाइड ब्रांड लॉन्च करने की तैयारी में हैं। उम्मीद है कि इनकी कीमतें प्रति माह ₹1,300 से ₹8,000 के बीच होंगी, जो Novo Nordisk के Ozempic की ₹8,800 से ₹11,175 प्रति माह की कीमत से काफी कम है। इसका मकसद भारत में 10.1 करोड़ से अधिक डायबिटीज और मोटापे से पीड़ित वयस्कों के लिए GLP-1 थेरेपी को अधिक सुलभ बनाना है।
मार्केट रेस और रिस्क
भारत का GLP-1 मार्केट, जो फरवरी 2026 तक ₹1,446 करोड़ का था और जिसके घरेलू स्तर पर $1 बिलियन से अधिक होने की उम्मीद है, अब मार्केट शेयर के लिए एक बड़ी रेस का मैदान बन गया है। Dr. Reddy's, Sun Pharma, Alkem Laboratories और Natco Pharma जैसी कंपनियां इस सेक्टर में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही हैं।
Dr. Reddy's के लिए 'Olymviq' नाम का लीगल डिस्प्यूट एक बड़ा जोखिम है। कोर्ट के स्टे ऑर्डर से री-ब्रांडिंग की नौबत आ सकती है, जिससे मार्केट में एंट्री में देरी होगी और ऑपरेशनल खर्च बढ़ जाएंगे। दवा कंपनियों के बीच कड़ी प्राइस वॉर से सभी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आने की आशंका है। इसके अलावा, इन दवाओं के गलत इस्तेमाल (जैसे कि लाइफस्टाइल या कॉस्मेटिक कारणों से) को लेकर रेगुलेटरी एक्शन का खतरा भी बना हुआ है।