कोर्ट से Dr. Reddy's को मिली बड़ी राहत
दिल्ली हाई कोर्ट ने Dr. Reddy's Laboratories को एक बड़ी राहत देते हुए, अपनी 'Olymviq' ब्रांड नाम की सेमाग्लूटाइड (semaglutide) दवा का मौजूदा स्टॉक बेचने के लिए 30 दिन का समय दिया है। यह अंतरिम आदेश कंपनी को दवा को 'Olymra' नाम से रीब्रांड करने से पहले अपने इन्वेंट्री को बेचने की अनुमति देता है। यह फैसला डेनमार्क की दिग्गज दवा कंपनी Novo Nordisk द्वारा दायर ट्रेडमार्क चुनौती के जवाब में आया है। कोर्ट ने कहा कि वह मौजूदा स्टॉक को नष्ट करने का आदेश नहीं देगा, बल्कि उसके व्यवस्थित निपटान को प्राथमिकता देगा। Dr. Reddy's ने पहले अदालत को सूचित किया था कि वे विवाद को सुलझाने के लिए एक नया ब्रांड नाम प्रस्तावित करने की योजना बना रहे हैं।
Novo Nordisk की चिंताएं और कानूनी लड़ाई
Novo Nordisk, जो GLP-1 दवाओं के बाजार में एक बड़ा नाम है, ने Dr. Reddy's के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। कंपनी का मुख्य तर्क यह था कि 'Olymviq' नाम उनके स्थापित सेमाग्लूटाइड ब्रांड, विशेष रूप से 'Ozempic', से बहुत ज्यादा मिलता-जुलता है। Novo Nordisk का मानना था कि इस समानता के कारण मरीजों और डॉक्टरों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जो अंततः रोगी सुरक्षा और ब्रांड की पहचान को प्रभावित कर सकता है।
भारत में जेनेरिक दवाओं का बढ़ता बाजार
यह कानूनी विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में पेटेंट समाप्त होने के बाद जेनेरिक सेमाग्लूटाइड (generic semaglutide) के वर्जन बड़ी संख्या में उपलब्ध हो रहे हैं। उम्मीद है कि बाजार में कम लागत वाले कई विकल्प आएंगे, जिससे प्रतिस्पर्धा और तेज हो जाएगी। ऐसे माहौल में, ब्रांड नाम बाजार में अपनी पहचान बनाने और उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण लड़ाई का मैदान बन गए हैं। उल्लेखनीय है कि Dr. Reddy's अपनी सेमाग्लूटाइड दवा को 'Obeda' ब्रांड नाम के तहत भी बेचती है।