Dr. Reddy's Laboratories ने भारत में अपना नया सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) इंजेक्शन, Obeda, लॉन्च तो कर दिया है, लेकिन कंपनी को आते ही एक 'कीमतों की जंग' का सामना करना पड़ रहा है। यह सेगमेंट, जो टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे के इलाज के लिए तेजी से बढ़ रहा है, अब जेनेरिक दवाओं से भर गया है।
पेटेंट खत्म होने के दिन ही Sun Pharmaceutical Industries, Lupin, और Natco Pharma जैसी 12 से ज्यादा भारतीय दवा कंपनियों ने अपने जेनेरिक सेमाग्लूटाइड वर्जन बाजार में उतार दिए। इस जबरदस्त प्रतिस्पर्धा के कारण कीमतों में भारी गिरावट आई है। जहां पेटेंट वाली दवाओं की कीमत ₹8,800 से ₹10,850 प्रति माह तक थी, वहीं अब जेनेरिक दवाएं ₹1,290 प्रति माह (vial format) तक में उपलब्ध हैं। Dr. Reddy's का Obeda, जो ₹4,200 प्रति माह पर लॉन्च हुआ है, इस आक्रामक मूल्य निर्धारण (pricing) के मुकाबले काफी महंगा साबित हो रहा है।
Dr. Reddy's को DCGI (Drugs Controller General of India) से इस जेनेरिक इंजेक्शन के लिए तेजी से मंजूरी मिली थी। Obeda, एक प्री-फिल्ड पेन के जरिए सप्ताह में एक बार लगाया जाने वाला इंजेक्शन है, जो ब्लड शुगर और भूख को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह भारत की 10.1 करोड़ से अधिक पीड़ित डायबिटीज आबादी के लिए एक अहम इलाज साबित हो सकता है, लेकिन ऊंची कीमत एक बाधा बन सकती है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि 40 से ज्यादा निर्माता और 50 से अधिक ब्रांड नामों के साथ, यह बाजार बहुत तेजी से संतृप्त (saturated) हो जाएगा, जिससे सभी कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ेगा। $11.54 बिलियन के मार्केट कैप वाली Dr. Reddy's, जिसका डेट-टू-इक्विटी रेशियो सिर्फ 0.18 है, के लिए यह साबित करना एक बड़ी चुनौती होगी कि वह अपनी ग्लोबल 'One Product, One Quality' विजन को घरेलू बाजार की लागत और मूल्य प्रतिस्पर्धा के बीच कैसे बनाए रखती है।
कंपनी के CEO Erez Israeli ने जेनेरिक सेमाग्लूटाइड के ग्लोबल विस्तार की योजना बनाई है, और भारत में Obeda की यह लड़ाई उनकी इस रणनीति का अहम पड़ाव है। एनालिस्ट इस शेयर पर मिले-जुले रुख में हैं, जो इस प्रतिस्पर्धी बाजार में Dr. Reddy's की राह की अनिश्चितता को दर्शाता है।
