US मार्केट में जारी दबाव की मुख्य वजह रेवलिमिड (Revlimid) के पेटेंट (Patent) की एक्सपायरी है। इससे कंपनी के नॉर्थ अमेरिका रेवेन्यू में 33% तक की तिमाही-दर-तिमाही गिरावट आ सकती है। इस फैक्टर के अलावा, बढ़ते फ्रेट कॉस्ट (Freight Costs) और ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions) भी कंपनी के मार्जिन पर असर डाल रहे हैं।
इसके विपरीत, Dr Reddy's का डोमेस्टिक बिजनेस (Domestic Business) शानदार ग्रोथ दिखा रहा है। यहां 15% से 18% की डबल-डिजिट ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ का अनुमान है। इस ग्रोथ को नई दवाओं के लॉन्च से और भी बल मिला है, खासकर मार्च में लॉन्च हुई जेनेरिक सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) इंजेक्शन 'ओबेडा' (Obeda), जिससे चालू तिमाही और आने वाले फाइनेंशियल ईयर 2027 में अच्छी कमाई की उम्मीद है। भारत के फार्मा मार्केट में भी पिछले पांच तिमाहियों में सबसे अच्छी 10.5% की वैल्यू ग्रोथ देखी गई।
कंपनी अपने बायोसिमिलर (Biosimilar) पाइपलाइन और GLP-1 ड्रग्स के अप्रूवल को भविष्य के लिए बड़ा ग्रोथ कैटलिस्ट (Growth Catalyst) मान रही है।
मार्केट कैप के लिहाज से Dr Reddy's का वैल्यूएशन लगभग 11 बिलियन डॉलर है। इसका पिछले बारह महीनों का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) करीब 17-18x है, जो Sun Pharma (लगभग 36.7x) जैसे मुकाबले कम है। 2026 में अब तक (Year-to-Date) इसके शेयर में लगभग 5.77% की गिरावट दर्ज की गई है।
हालांकि, कंपनी को कुछ महत्वपूर्ण जोखिमों का भी सामना करना पड़ रहा है। US जेनेरिक मार्केट में लगातार प्राइस कंपटीशन (Price Competition) बना हुआ है। वहीं, ब्राजील के ANVISA ने तकनीकी दिक्कतों के चलते कंपनी की डायबिटीज और वेट लॉस ड्रग 'एम्बेलटा' (Embeltah) को रिजेक्ट कर दिया था। इसके अतिरिक्त, रूस में टैक्स अथॉरिटीज (Tax Authorities) द्वारा VAT चार्जेज पर लगाए गए पेनल्टी (Penalty) ने भी ऑपरेशनल हर्डल्स (Operational Hurdles) बढ़ा दिए हैं।
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley ने हाल ही में Dr Reddy's के FY26 के लिए अर्निंग एस्टीमेट्स (Earnings Estimates) को रेवलिमिड के फेज-आउट (Phase-out) और GLP-1 ड्रग्स की अनिश्चितता के चलते थोड़ा कम किया है। हालांकि, फर्म को उम्मीद है कि 2028 (FY28) के बाद सेमाग्लूटाइड और बायोसिमिलर की बिक्री से मार्जिन में सुधार होगा।
Dr Reddy's Laboratories 12 मई, 2026 को अपने Q4 FY26 के नतीजे पेश करने वाली है।
