Dr. Reddy’s Laboratories के पिडिभीमवरम स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को लेकर बुरी खबर आई है। USFDA ने यहां निरीक्षण के बाद **2** ऑब्जर्वेशन जारी किए हैं, जिसके चलते निवेशकों का भरोसा डगमगाया और शेयर **1.86%** टूट गया।
क्या है पूरा मामला?
Dr. Reddy’s Laboratories ने जानकारी दी है कि 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर, 2026 के बीच कंपनी के पिडिभीमवरम (आंध्र प्रदेश) स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का 'प्री-अप्रूवल इंस्पेक्शन' किया गया था। इस दौरान अमेरिकी रेगुलेटर USFDA ने कंपनी को 2 ऑब्जर्वेशन दिए हैं।
इस खबर के सामने आते ही BSE पर कंपनी के शेयरों में बिकवाली देखी गई और यह 1.86% की गिरावट के साथ बंद हुआ।
क्या होता है 'Form 483'?
नियामकीय भाषा में, USFDA द्वारा जारी किए गए इन ऑब्जर्वेशन को 'Form 483' के जरिए सूचित किया जाता है। इसे कोई प्रतिबंध या ड्रग बैन नहीं माना जाता, लेकिन यह एक चेतावनी होती है कि प्लांट में सुधार की जरूरत है। कंपनी को अब इन कमियों को दूर करना होगा और रेगुलेटर को इसका संतोषजनक जवाब देना होगा।
निवेशकों की चिंता क्यों?
किसी भी फार्मा कंपनी के लिए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट उसकी रीढ़ होते हैं, खासकर जब बात अमेरिकी बाजार में दवाएं एक्सपोर्ट करने की हो। चिंता इस बात की है कि अगर इन ऑब्जर्वेशन को समय पर हल नहीं किया गया, तो प्लांट से जुड़ी नई दवाओं के अप्रूवल (Product Approvals) में देरी हो सकती है।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वे रेगुलेटर द्वारा तय समय सीमा के भीतर इन मुद्दों को सुलझाने के लिए काम कर रहे हैं। अब मार्केट की नजर इस बात पर है कि कंपनी सुधार की प्रक्रिया को कितनी जल्दी पूरा करती है, क्योंकि देरी होने पर कंपनी का कंप्लायंस खर्च बढ़ सकता है और भविष्य के प्रोडक्ट लॉन्च पर असर पड़ सकता है।
