स्ट्रैटेजिक मर्जर से कंपनी को क्या होगा फायदा?
Dr. Agarwal's Health Care Limited (AHCL) ने Dr. Agarwal’s Eye Hospital Limited (AEHL) के साथ अपने प्रस्तावित मर्जर की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। 16-17 फरवरी 2026 को BSE लिमिटेड और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) से मिली ये महत्वपूर्ण मंजूरी, Dr. Agarwal’s Group के तहत दोनों कंपनियों के विलय की प्रक्रिया में अहम पड़ाव हैं।
इस मर्जर का मुख्य उद्देश्य परिचालन (Operational) और वित्तीय (Financial) दक्षता को बढ़ाना है। इसके जरिए कंपनी का लक्ष्य फंक्शन्स को सुव्यवस्थित करना, निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करना, पूंजी आवंटन (Capital Allocation) को एक करना और भविष्य के विकास को सहारा देने के लिए एक मजबूत बैलेंस शीट तैयार करना है। प्रबंधन (Management) का मानना है कि इस विलय से पहले ही फाइनेंशियल ईयर से EPS में बढ़ोतरी (EPS accretive) होगी, जिससे शेयरधारकों का मूल्य (Shareholder Value) बढ़ेगा।
विलय की योजना के तहत, AHCL, AEHL के पात्र शेयरधारकों को प्रति 2 इक्विटी शेयर के बदले 23 नए इक्विटी शेयर जारी करेगी, जिसमें AHCL की मौजूदा हिस्सेदारी शामिल नहीं है। AEHL ने लगभग ₹70 करोड़ के प्रेफरेंशियल इश्यू को भी मंजूरी दी है। AHCL खुद एक नई लिस्टेड कंपनी है, जिसने फरवरी 2025 में ही स्टॉक एक्सचेंजों पर डेब्यू किया था। कंपनी के IPO प्रॉस्पेक्टस में तीन साल के भीतर ऐसे विलय की मंशा का उल्लेख था।
मर्जर में क्या हैं चुनौतियां और आगे की राह?
BSE और NSE की मंजूरी के बावजूद, यह मर्जर अभी भी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से अंतिम मंजूरी, साथ ही दोनों कंपनियों के शेयरधारकों और क्रेडिटर्स की मंजूरी पर निर्भर है। यह प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है, और मर्जर के बाद इंटीग्रेशन (Integration) की चुनौतियां भी आ सकती हैं। SEBI ने भी कुछ खास टिप्पणियां और शर्तें रखी हैं, जिनका AHCL को पालन करना होगा, जैसा कि NSE की ऑब्जर्वेशन लेटर में बताया गया है।
कंपनी अभी तेजी से विस्तार (Growth Phase) के दौर में है। दिसंबर 2025 तक 272 से अधिक सुविधाओं का संचालन करने वाली AHCL की 55-60 नई सुविधाएं जोड़ने की भी योजना है। ऐसे में, विलय की गई इकाइयों को सफलतापूर्वक एकीकृत (Integrate) करने के साथ-साथ इस विस्तार को जारी रखना कंपनी के लिए महत्वपूर्ण होगा।
कंपनी का पिछला रिकॉर्ड
यह ध्यान देने योग्य है कि 2013 में, Dr. Agarwal's Eye Hospital Limited को SEBI से नियामकीय कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। कंपनी न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (MPS) मानदंडों को समय पर पूरा करने में विफल रही थी। SEBI ने तब कंपनी के वोटिंग अधिकारों और कॉर्पोरेट लाभों को फ्रीज कर दिया था, लेकिन बाद में जब कंपनी ने एम्प्लॉई स्टॉक परचेज स्कीम (ESPS) के माध्यम से शेयर जारी कर अनुपालन किया, तो इन प्रतिबंधों को हटा दिया गया। इसके परिणामस्वरूप प्रमोटर होल्डिंग घटकर 74.90% और पब्लिक शेयरहोल्डर्स की हिस्सेदारी 25.10% हो गई, जिससे नियम पूरे हो गए। SEBI ने कंपनी को भविष्य में सभी लागू कानूनों और नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने की चेतावनी दी थी।
प्रतिस्पर्धी परिदृश्य (Peer Comparison)
भारतीय आई-केयर (Eye Care) सेक्टर काफी प्रतिस्पर्धी है और इसमें तेजी से कंसॉलिडेशन (Consolidation) हो रहा है। Dr. Agarwal's Health Care का दावा है कि वह रेवेन्यू के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी आई-केयर सर्विस चेन है, जिसका मार्केट शेयर FY2024 में लगभग 25% था और सबसे अधिक सुविधाएं इसके पास हैं। कंपनी ने हाल ही में Q3 FY26 में 23% ईयर-ऑन-ईयर (YoY) रेवेन्यू ग्रोथ के साथ शानदार प्रदर्शन दर्ज किया था।
प्रतिद्वंद्वी, जैसे Centre for Sight, जिसके लगभग 83 सेंटर हैं और इसने FY25 में ₹582 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था, PE फंड की मदद से विस्तार कर रहे हैं। LV Prasad Eye Institute (LVPEI) एक नॉन-प्रॉफिट संस्था है और दुनिया के सबसे बड़े आई-केयर नेटवर्कों में से एक है, जिसके 300 से अधिक सेंटर हैं। Vasan Eye Care, जिसे मार्च 2023 में ASG Eye Hospitals ने अधिग्रहित किया था, उसका भी ऐतिहासिक रूप से एक बड़ा नेटवर्क और रेवेन्यू था। इस सेक्टर में मार्जिन (Margins) काफी अच्छा है, जिसमें आई-केयर चेन के EBITDA मार्जिन अन्य स्पेशियलिटी प्लेयर्स की तुलना में 5-10% अधिक होते हैं। वर्तमान मर्जर इस डायनामिक और बढ़ते बाजार में AHCL की स्थिति को और मजबूत करने का लक्ष्य रखता है।