दिल्ली पुलिस ने कैंसर की नकली दवाओं का एक बड़ा नेटवर्क ध्वस्त किया है, जो सरकारी अस्पतालों की सप्लाई चेन में सेंध लगाकर जानलेवा गोरखधंधा चला रहे थे। इस मामले में अब तक **17** लोग गिरफ्तार किए गए हैं और राजस्थान सरकार ने RMSCL की प्रोक्योरमेंट फाइलों की जांच के आदेश दे दिए हैं।
कैसे चल रहा था गोरखधंधा?
दिल्ली पुलिस की जांच में एक बेहद शातिर तरीका सामने आया है। गिरोह के सदस्य असली कैंसर दवाओं की शीशियों को चुराते थे, उनमें से असली दवा निकालकर उसे मामूली लिक्विड से भर देते थे और फिर उसे वापस सप्लाई चेन में भेज देते थे। लैब टेस्ट में पाया गया कि इन शीशियों में कोई भी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (API) नहीं था। जांच एजेंसियों ने छापेमारी के दौरान 588 ऐसी शीशियां बरामद की हैं और ₹50 लाख कैश भी जब्त किया है। पकड़ी गई दवाओं की कुल मार्केट वैल्यू ₹9 करोड़ आंकी गई है।
किन दवाओं के नाम पर धोखा?
इस रैकेट में Avelumab, Darzalex, Imfinzi, Erbitux, Adcetris, और Keytruda जैसी महंगी और गंभीर कैंसर दवाओं के नकली लेबल का इस्तेमाल किया गया था। ये दवाएं कैंसर के इलाज में जीवन रक्षक मानी जाती हैं।
राजस्थान सरकार सख्त
राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) के नेटवर्क में इन नकली बैचों के मिलने के बाद राजस्थान के हेल्थ मिनिस्टर गजेंद्र सिंह खिमसर ने एक हाई-लेवल जांच के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार अब प्रोक्योरमेंट रिकॉर्ड और इन्वेंट्री लॉग्स का गहन ऑडिट करवा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सिस्टम के अंदर से किसने इस जालसाजी में मदद की।
फार्मा सेक्टर के लिए सबक
यह घटना भारत की फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करती है। निवेशक और स्टेकहोल्डर्स अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या सरकार आगे चलकर 'QR-बेस्ड सीरियलाइजेशन' और 'डिजिटल इन्वेंट्री वेरिफिकेशन' जैसे अनिवार्य नियमों को सख्ती से लागू करेगी। आने वाले समय में प्रोक्योरमेंट पॉलिसी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
