दिल्ली सरकार ने हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव का ऐलान किया है। द्वारका में **₹805.99 करोड़** की लागत से एक नया मेडिकल कॉलेज बनाया जाएगा, साथ ही मेडिकल सीटों की संख्या में भी बढ़ोतरी की गई है।
दिल्ली सरकार ने राज्य में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना पेश की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि अंडरग्रेजुएट मेडिकल सीटें 595 से बढ़ाकर 820 की जाएंगी, वहीं पोस्टग्रेजुएट और DNB स्लॉट 553 से बढ़ाकर 762 किए जाएंगे। इस विस्तार का मुख्य केंद्र इंदिरा गांधी हॉस्पिटल, द्वारका में बनने वाला नया मेडिकल कॉलेज है, जिसके लिए ₹805.99 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
सुविधाएं और इंश्योरेंस कवरेज का दायरा
इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा, सरकार 415 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' शुरू कर रही है। निवासियों को बेहतर वित्तीय सुरक्षा देने के लिए आयुष्मान भारत स्कीम के तहत सालाना हेल्थ कवर को बढ़ाकर ₹10 लाख कर दिया गया है। इस मिशन को गति देने के लिए 1,200 से ज्यादा नर्सों और करीब 1,000 सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की भर्ती की गई है।
चुनौतियां और निगरानी
दिल्ली के हेल्थकेयर सेक्टर की राह में कुछ पुरानी मुश्किलें भी हैं। CAG की पिछली रिपोर्ट्स ने प्रोजेक्ट्स में देरी और संसाधनों के गलत इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। LNJP अस्पताल जैसे प्रोजेक्ट्स में लागत बढ़ने और समय पर काम पूरा न होने के मामले पहले भी सामने आए हैं।
इसके अलावा, मौजूदा समय में प्रशासनिक दबाव भी कम नहीं है। एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) मेडिकल प्रोक्योरमेंट से जुड़े करीब ₹842 करोड़ के मामलों की जांच कर रही है। साथ ही, लगभग ₹5,590 करोड़ के कुल अस्पताल निर्माण प्रोजेक्ट्स भी विजिलेंस की जांच के घेरे में हैं। इन जांचों का सीधा असर भविष्य के टेंडर और प्रोजेक्ट्स की गति पर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
इन्वेस्टर्स और ऑब्जर्वर्स के लिए अब यह देखना अहम होगा कि नए द्वारका मेडिकल कॉलेज की टेंडर प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रहती है। सरकार क्या पुरानी गलतियों से सीखकर बिना किसी कॉस्ट ओवररन के समय पर काम पूरा कर पाएगी? यह इस पूरे हेल्थ एक्सपेंशन प्रोजेक्ट की कामयाबी का सबसे बड़ा टेस्ट होगा।
