देहरादून स्थित Daffohils Laboratories विवादों के घेरे में है। फेडरल ड्रग रेगुलेटर्स ने जुलाई 2026 में कंपनी को कामकाज रोकने की सिफारिश की थी, लेकिन सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी के कारण प्लांट अब भी चालू है।
दवा निर्माता कंपनी Daffohils Laboratories Private Limited इस समय रेगुलेटर्स की रडार पर है। जुलाई 2026 में Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) ने देहरादून के सेलाकुई स्थित कंपनी की फैसिलिटी में बड़ी खामियां पाई थीं, जिसके बाद उत्पादन तुरंत बंद करने के आदेश दिए गए थे।
गंभीर आरोप और डेटा में हेरफेर
जांच में सामने आया है कि मार्च 2026 में एक व्हिसलब्लोअर की शिकायत के बाद छापेमारी की गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी में Good Manufacturing Practices का भारी उल्लंघन हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी ने बिना फंक्शनल माइक्रोबायोलॉजी लैब के ही टेस्ट रिपोर्ट्स तैयार कर लीं। आरोप है कि क्वालिटी कंट्रोल टेस्ट पूरे होने से पहले ही दवाओं को बाजार में भेज दिया गया और Certificates of Analysis की तारीखों में हेरफेर की गई।
रेगुलेटरी डेडलॉक (Regulatory Stalemate)
हालात यह हैं कि कंपनी का लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश के बावजूद प्लांट बंद नहीं हुआ है। CDSCO का कहना है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत लाइसेंस सस्पेंड करने की शक्ति Uttarakhand State Licensing Authority के पास है, लेकिन राज्य प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
मैनेजमेंट का पक्ष
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर IPS Chawla ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि सभी स्पष्टीकरण रेगुलेटर्स को सौंप दिए गए हैं और ये मुद्दे केवल तकनीकी रिकॉर्ड से संबंधित हैं, न कि क्वालिटी से जुड़ी कोई बड़ी विफलता। हालांकि, इस पूरे मामले ने फार्मा सप्लाई चेन और थर्ड-पार्टी मैन्युफैक्चरिंग में रेगुलेटरी निगरानी की पोल खोलकर रख दी है।
