Cytiva का भारत में बड़ा दांव: बेंगलुरु में नई सुविधा से देश की बायोइकोनॉमी को मिलेगी रफ्तार, APAC फार्मा में क्रांति

HEALTHCAREBIOTECH
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
Cytiva का भारत में बड़ा दांव: बेंगलुरु में नई सुविधा से देश की बायोइकोनॉमी को मिलेगी रफ्तार, APAC फार्मा में क्रांति
Overview

Cytiva ने भारत के बेंगलुरु शहर में **30,000 वर्ग फुट** की एक नई, बड़ी और अत्याधुनिक सुविधा का उद्घाटन किया है। इसका मुख्य लक्ष्य बायोफार्मास्युटिकल (Biopharmaceutical) विकास और निर्माण को तेज करना है, और यह सीधे तौर पर भारत के **$300 बिलियन** के बायोइकोनॉमी लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।

भारत के बायोइकोनॉमी लक्ष्य को मिली नई उड़ान

यह 30,000 वर्ग फुट का नया बायोप्रोसेसिंग सेंटर सिर्फ एक विस्तार नहीं है, बल्कि यह भारत के महत्वाकांक्षी बायोइकोनॉमी लक्ष्यों के साथ एक रणनीतिक कदम है। यह अत्याधुनिक सुविधा, जो 200 लीटर तक की उन्नत सिंगल-यूज बायोरिएक्टर (Single-Use Bioreactor) तकनीक से लैस है, प्रीक्लिनिकल मटेरियल के उत्पादन को तेज करने और बड़े बायोफार्मा वैल्यू चेन को सहारा देने के लिए तैयार की गई है। इसका सीधा असर भारत के 2030 तक $300 बिलियन की बायोइकोनॉमी बनने के सपने पर पड़ेगा। यह स्थानीय और क्षेत्रीय कंपनियों को जटिल विकास प्रक्रियाओं को अधिक तेजी और भरोसे के साथ पूरा करने के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करेगा।

देश के विकास को मिलेगी गति

भारत की बायोइकोनॉमी ने पिछले कुछ सालों में जबरदस्त ग्रोथ दिखाई है, जो 2014 में लगभग $10 बिलियन से बढ़कर 2024 में अनुमानित $165.7 बिलियन हो गई है। सरकार की सपोर्टिव पॉलिसीज़ जैसे BioE3 पॉलिसी और नेशनल बायोफार्मा मिशन (NBM)-इनोवेट इन इंडिया (i3), और तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम इस ग्रोथ को बढ़ा रहे हैं। Cytiva का यह निवेश ऐसे समय में आया है जब देश इस तेजी को और आगे ले जाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। सिंगल-यूज बायोरिएक्टर तकनीक, जो फ्लेक्सिबल और स्केलेबल प्रोडक्शन का समर्थन करती है, आधुनिक थेरेपी और पर्सनलाइज्ड मेडिसिन की ओर बढ़ते सेक्टर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

एशिया-पैसिफिक में बायोफार्मा सेक्टर का नया चेहरा

बेंगलुरु सेंटर का प्रभाव सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका लक्ष्य एशिया-पैसिफिक (APAC) क्षेत्र की बायोफार्मा कंपनियों के लिए डेवलपमेंट टाइमलाइन को कम करना और मैन्युफैक्चरिंग रिस्क को घटाना है। यह सप्लाई चेन को मजबूत करने और रीजनल मैन्युफैक्चरिंग कैपेबिलिटीज़ को बढ़ाने के ग्लोबल ट्रेंड के साथ मेल खाता है। लोकल एक्सपर्टीज और एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करके, Cytiva नई और स्थापित कंपनियों को रिसर्च को तेजी से मार्केट में लाने में मदद कर सकती है। सिंगल-यूज बायोरिएक्टर मार्केट भारत में एक बड़ा ग्रोथ एरिया है, जिसके 2025 में $3.7 बिलियन से बढ़कर 2032 तक $10.9 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसकी एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 16.7% है।

सिंगल-यूज तकनीक का फायदा

Cytiva का सिंगल-यूज बायोरिएक्टर तकनीक पर फोकस इंडस्ट्री की बदलती जरूरतों का सीधा जवाब है। पारंपरिक रिएक्टरों की तुलना में, ये सिस्टम अधिक फ्लेक्सिबिलिटी, कंटैमिनेशन का कम जोखिम और तेज टर्नअराउंड टाइम प्रदान करते हैं। यह 200 लीटर तक स्केल-अप करने और प्रीक्लिनिकल स्टेज के लिए टॉक्सिसिटी बैच मटेरियल का उत्पादन करने की सुविधा, अर्ली-स्टेज सपोर्ट सिस्टम के तौर पर महत्वपूर्ण है। सेल और जीन थेरेपी मैन्युफैक्चरिंग जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों के लिए यह तकनीक और भी जरूरी हो गई है।

कॉम्पिटिशन और भविष्य की राह

Cytiva इस क्षेत्र में Thermo Fisher Scientific, Sartorius AG, Merck KGaA और Lonza Group AG जैसी कंपनियों से मुकाबला करेगी। हालांकि, Cytiva की पेरेंट कंपनी Danaher Corporation, Pall Corporation जैसी अपनी सहायक कंपनियों के साथ मिलकर इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस प्रदान करती है। भारत का कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन (CDMO) सेक्टर भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसके 2028 तक दोगुना होने की उम्मीद है।

### चुनौतियाँ भी कम नहीं

इतनी उम्मीदों के बावजूद, कुछ चुनौतियां भी हैं। भारत का बायो-सेक्टर अभी भी विकसित हो रहा है और रेगुलेटरी प्रक्रियाएं, भले ही सुधर रही हों, लेकिन फिर भी बाधाएं खड़ी कर सकती हैं। कुछ एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज के लिए इंपोर्टेड कच्चे माल और कंपोनेंट्स पर निर्भरता एक कमजोरी हो सकती है। इसके अलावा, कड़े ग्लोबल कॉम्पिटिशन के कारण लगातार इनोवेशन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बनाए रखना जरूरी होगा।

आगे की राह

Cytiva की बेंगलुरु सुविधा भारत के बायोफार्मास्युटिकल और बायो-मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अनुमानित भारी ग्रोथ का फायदा उठाने और उसमें योगदान देने के लिए तैयार है। जैसे-जैसे भारत वॉल्यूम-आधारित एक्सपोर्टर से वैल्यू-ड्रिवेन लीडर बनने की ओर बढ़ रहा है, Cytiva जैसी सुविधाएं इस बदलाव को सक्षम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। कंपनी का यह निवेश एशिया के विकसित हो रहे बायोफार्मा इकोसिस्टम का एक अभिन्न हिस्सा बनने की दीर्घकालिक रणनीति को दर्शाता है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.