बोनस और नतीजों का डबल धमाका!
Cupid Limited के शेयर ने सोमवार, 9 मार्च 2026 को ज़बरदस्त छलांग लगाई, करीब 13-15% की तेजी दर्ज की गई। इस उछाल का सबसे बड़ा कारण था 4:1 बोनस शेयर इश्यू के बाद स्टॉक का एक्स-बोनस (ex-bonus) ट्रेडिंग में आना। इस कॉर्पोरेट एक्शन से शेयर की कीमत को संभालना और लिक्विडिटी बढ़ाना आसान होता है। इस मौके पर NSE पर ट्रेडिंग वॉल्यूम में भारी इज़ाफ़ा हुआ, जो पिछले दो हफ्तों के एवरेज से 34.57 गुना बढ़कर करीब 4.97 करोड़ शेयरों तक पहुंच गया।
इस तेज़ी को कंपनी के तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के शानदार नतीजों का भी सहारा मिला। Cupid Limited ने ऑपरेशन से ₹93.51 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 101.7% ज़्यादा है। वहीं, नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में तो बम्पर 196.6% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹32.87 करोड़ पर पहुंच गया। अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹0.41 से बढ़कर ₹1.22 हो गया। कंपनी पर लगभग कोई कर्ज नहीं है और इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹12,300 करोड़ है। ROCE (रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड) 17.1% और ROE (रिटर्न ऑन इक्विटी) 12.9% के आसपास है।
वैल्यूएशन और ग्रोथ पर सवाल?
इन मजबूत नंबर्स के बावजूद, Cupid के शेयर का वैल्यूएशन (Valuation) काफी ज़्यादा चिंता का विषय बना हुआ है। मार्च 2026 की शुरुआत तक, कंपनी का P/E रेश्यो 129x से 147x के बीच चल रहा था। यह अपने सेक्टर के बड़े खिलाड़ियों जैसे Page Industries (P/E ~45x-47x) और Go Fashion (P/E ~22x-45x ) की तुलना में बहुत ज़्यादा है।
पिछली तीन सालों में कंपनी की सेल्स ग्रोथ सिर्फ 2.70% रही है, जो इतने हाई वैल्यूएशन को सही नहीं ठहराती। साथ ही, कंपनी के वर्किंग कैपिटल डेज़ (Working Capital Days) में भी बढ़ोतरी हुई है, जो ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर सवाल खड़े करती है।
बाज़ार की चिंताएं और भविष्य
जानकारों का मानना है कि बोनस इश्यू और नतीजों की ख़ुशी के बीच, वॉल्यूम में इतना बड़ा उछाल सिर्फ फंडामेंटल के कारण नहीं, बल्कि सट्टेबाजी (speculative activity) के कारण भी हो सकता है। 4:1 बोनस शेयर ने प्रति शेयर आय (EPS) और बुक वैल्यू जैसे मेट्रिक्स को यांत्रिक रूप से कम कर दिया है।
MarketsMOJO जैसे एनालिस्ट्स ने 'होल्ड' (Hold) रेटिंग देते हुए Cupid के 'बहुत महंगे' वैल्यूएशन का जिक्र किया है, जिसका P/B रेश्यो करीब 29 और PEG रेश्यो 2.3 के आसपास है। पिछले क्वार्टर में इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने भी अपनी हिस्सेदारी 1.15% कम की है। हाल ही में एक इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के इस्तीफे ने भी कंपनी के गवर्नेंस पर थोड़ी अनिश्चितता बढ़ाई है। पिछले पांच सालों में 2.70% की मामूली सेल्स ग्रोथ, इतने ऊंचे वैल्यूएशन मल्टीपल वाली कंपनी के लिए एक बड़ी चिंता है।
भारत का टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर भले ही ग्रोथ के पथ पर है, लेकिन निर्यात में आई गिरावट जैसी कुछ चुनौतियां भी हैं। Cupid की Q3 परफॉर्मेंस अच्छी रही, लेकिन इसकी टिकाऊपन (sustainability) लगातार मुनाफा और मार्जिन बढ़ाने पर निर्भर करेगा, और यह भी देखना होगा कि यह बढ़त शेयर की संख्या में हुई बढ़ोतरी से ज़्यादा हो। एनालिस्ट्स का सतर्क रुख बताता है कि बाज़ार में कंसॉलिडेशन या संभावित गिरावट की उम्मीद की जा रही है, खासकर अगर ग्रोथ धीमी पड़ती है। कंपनी को अपने प्रीमियम वैल्यूएशन को सही ठहराने के लिए मीडियम टर्म में लगातार और मज़बूत ग्रोथ दिखानी होगी।