Corona Remedies का बड़ा प्लान: FY29 तक अहमदाबाद प्लांट से यूरोपीय देशों में एक्सपोर्ट शुरू!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Corona Remedies का बड़ा प्लान: FY29 तक अहमदाबाद प्लांट से यूरोपीय देशों में एक्सपोर्ट शुरू!

Corona Remedies ने अपने नए ₹130 करोड़ के EU-GMP अप्रूव्ड हार्मोन प्लांट से FY29 तक अंतरराष्ट्रीय एक्सपोर्ट शुरू करने की योजना बनाई है। कंपनी ने यूरोप और यूके के बाजारों के लिए एग्रीमेंट साइन कर लिए हैं, और 2026 के अंत तक रेगुलेटरी फाइलिंग का लक्ष्य है।

Corona Remedies अब दुनिया भर में अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए तैयार है। कंपनी अहमदाबाद में एक नया हार्मोन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट (Manufacturing Plant) लगा रही है। करीब ₹130 करोड़ की लागत से बने इस प्लांट को EU-GMP का अप्रूवल भी मिल गया है, जो यूरोपियन यूनियन (EU) में दवाएं एक्सपोर्ट करने के लिए जरूरी स्टैंडर्ड है। कंपनी का इरादा फाइनेंशियल ईयर 2029 तक यूरोप और यूनाइटेड किंगडम (UK) में अपने प्रोडक्ट्स की शिपिंग शुरू करना है।

एक्सपोर्ट की राह और रेगुलेटरी प्लान

अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचना एक लंबी और जटिल रेगुलेटरी प्रक्रिया से गुजरता है। Corona Remedies को उम्मीद है कि 2026 के अंत तक सभी जरूरी रेगुलेटरी डॉक्यूमेंट्स फाइल कर दिए जाएंगे, जैसे ही चल रहे बायोइक्विवेलेंस स्टडीज (Bioequivalence studies) पूरी होंगी। मैनेजमेंट का अनुमान है कि इन अप्रूवल को मिलने में करीब 18 महीने लग सकते हैं। हालांकि, यह प्लांट अब ऑपरेशनल है, लेकिन इसका कंपनी के कुल रेवेन्यू पर तुरंत असर कम ही रहेगा, अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 में यह 1% से भी कम होगा। आने वाले तीन सालों में जैसे-जैसे नए एक्सपोर्ट मार्केट खुलेंगे, यह कंट्रीब्यूशन बढ़कर 2-3% तक पहुंचने का अनुमान है।

डोमेस्टिक मार्केट और इंटीग्रेशन

फिलहाल, महिलाओं के स्वास्थ्य (Women's healthcare) से जुड़े प्रोडक्ट्स कंपनी के डोमेस्टिक बिजनेस का एक बड़ा हिस्सा हैं, जो इसके कुल रेवेन्यू का करीब 30% है। अपने हार्मोन प्रोडक्ट लाइन को सपोर्ट करने के लिए, Corona Remedies ने La Chandra Pharma Labs में 31% की हिस्सेदारी खरीदी हुई है। यह इन्वेस्टमेंट बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward integration) की सुविधा देता है, जिसमें La Chandra कंपनी के जरूरी प्रोडक्ट्स जैसे प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) और टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) के लिए आवश्यक एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) का लगभग 60-65% हिस्सा सप्लाई करती है। इन इंग्रीडिएंट्स को इन-हाउस बनाने से कंपनी बाहरी सप्लायर्स पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगी और प्रोडक्शन कॉस्ट को कंट्रोल कर सकेगी।

विस्तार को समझना

यह कदम प्रोडक्शन कैपेसिटी में एक बड़ा बदलाव लाएगा, क्योंकि कंपनी अपनी मौजूदा सोलन (Solan) फैसिलिटी से कुछ मैन्युफैक्चरिंग को नए अहमदाबाद साइट पर शिफ्ट करने की योजना बना रही है। निवेशकों के लिए, सबसे अहम बातें यह होंगी कि यूरोप और यूके में रेगुलेटरी अप्रूवल कितनी तेजी से मिलते हैं, और कंपनी प्रतिस्पर्धी ग्लोबल मार्केट में उतरते हुए अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बनाए रखती है। भले ही कंपनी अपनी अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी बढ़ाना चाहती है, लेकिन भारत अभी भी बिजनेस का मुख्य मार्केट बना रहेगा। कंपनी को उम्मीद है कि अगले चार सालों में उसका अंतरराष्ट्रीय बिजनेस कुल रेवेन्यू का हाई सिंगल-डिजिट परसेंटेज तक पहुंच जाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.