Colossal Biosciences ने GenoMorph नाम का एक नया AI प्लेटफॉर्म पेश किया है। यह टूल डोडो जैसे लुप्त हो चुके जीवों को पुनर्जीवित करने के प्रोजेक्ट में आने वाली डेटा संबंधी बाधाओं को दूर करेगा। NeoGenesis Capital के सपोर्ट के साथ, कंपनी अपनी इस सिंथेटिक बायोलॉजी तकनीक को हेल्थ और एग्रीकल्चर जैसे कमर्शियल क्षेत्रों में भी ले जाने की तैयारी में है।
बायोटेक की दुनिया में डेटा की कमी हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे दूर करने के लिए Colossal Biosciences ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया है। इनका नया प्लेटफॉर्म GenoMorph, 3D मॉर्फोलॉजी और तुलनात्मक जीव विज्ञान के जरिए जेनेटिक मार्कर्स की सटीक मैपिंग करता है। डोडो जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए यह एक गेम चेंजर साबित हो सकता है, जहां जेनेटिक मटेरियल सीमित है और यह समझना मुश्किल होता है कि कौन से जींस शारीरिक बनावट को कंट्रोल करते हैं।
कैसे काम करता है GenoMorph?
यह AI मॉडल 70 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों के 3D स्कल डेटा और विकास संबंधी जानकारी पर आधारित है। इसने डोडो प्रोजेक्ट के लिए करीब 2,300 जेनेटिक टारगेट्स की पहचान कर ली है, जिससे वैज्ञानिकों को अब 'ट्रायल एंड एरर' की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
लैब प्रोसेस में क्रांतिकारी बदलाव
कंपनी ने लैब में काम करने की रफ्तार बढ़ाने के लिए लिपिड नैनोपार्टिकल्स (lipid nanoparticles) का इस्तेमाल शुरू किया है। इससे जीन-एडिटिंग के परिणामों को देखने के लिए पक्षियों के बड़े होने तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि सीधे भ्रूण (embryo) में बदलाव का असर देखा जा सकेगा।
कमर्शियल संभावनाओं पर नजर
इस बदलाव के पीछे बड़ा बिजनेस विजन है। Peter Diamandis द्वारा लॉन्च किया गया नया वेंचर कैपिटल फर्म NeoGenesis Capital अब उन कंपनियों को फंड करेगा जो Colossal के प्लेटफॉर्म का उपयोग करेंगी। कंपनी का लक्ष्य इसे केवल डी-एक्सटेंशन तक सीमित न रखकर हेल्थ, एग्रीकल्चर और पर्यावरण संरक्षण जैसे कमर्शियल सेक्टर में बड़े स्तर पर ले जाना है। भारतीय बायोटेक सेक्टर के निवेशकों के लिए यह डेवलपमेंट काफी अहम है, क्योंकि यह बताता है कि कैसे AI अब डेटा एनालिसिस से आगे बढ़कर कॉम्प्लेक्स बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग का हिस्सा बन चुका है।
