Cipla ने कैंसर की प्रायोगिक दवा TQB2102 के लिए चीन की Chia Tai Tianqing Pharmaceutical Group के साथ एक बड़ा करार किया है। इस साझेदारी का मकसद भारत सहित कई उभरते बाजारों में कंपनी के ऑन्कोलॉजी पोर्टफोलियो को मजबूत करना है।
दवा कंपनी Cipla Limited ने चीन की Chia Tai Tianqing Pharmaceutical Group के साथ एक विशेष लाइसेंसिंग समझौता किया है। इस डील के तहत, Cipla प्रायोगिक कैंसर दवा 'Rolditamig Deuderuxtecan' (TQB2102) को भारत, दक्षिण अफ्रीका और पांच अन्य उभरते बाजारों में लाने और बेचने की जिम्मेदारी संभालेगी। यह दवा HER2-एक्सप्रेसिंग कैंसर के इलाज के लिए तैयार की गई है, जो मेडिकल फील्ड में एक हाई-वैल्यू सेगमेंट माना जाता है।
गिरते मुनाफे के बीच नई उम्मीद
Cipla के लिए यह कदम अपने रेवेन्यू को डायवर्सिफाई करने की कोशिश है। कंपनी के फाइनेंशियल हेल्थ पर नजर डालें तो पहली तिमाही (FY27) में Cipla के नेट प्रॉफिट में लगभग 39% और EBITDA में करीब 33% की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे में TQB2102 जैसे लेट-स्टेज एसेट को अपने पाइपलाइन में शामिल करके कंपनी मार्जिन्स को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है।
ऑपरेशन्स और रिस्क का गणित
इस सौदे के तहत Cipla का काम क्लिनिकल ट्रायल्स और रेगुलेटरी मंजूरी लेना होगा, जबकि दवा के मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई की जिम्मेदारी चीनी पार्टनर पर बनी रहेगी। इसका मतलब है कि अगर मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर को उत्पादन में देरी या क्वालिटी कंट्रोल से जुड़ी कोई समस्या आती है, तो भारत में इस दवा के लॉन्च में देरी हो सकती है।
रेगुलेटरी ओवरहैंग और बाजार का नजरिया
फिलहाल, Cipla पर Pithampur और InvaGen जैसे प्लांटों में USFDA के निरीक्षण को लेकर रेगुलेटरी दबाव बना हुआ है, जिसका असर शेयर पर दिख सकता है। यह नई डील बिजनेस विस्तार के लिए तो सकारात्मक है, लेकिन कंपनी के मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग चैलेंज अभी भी बरकरार हैं। निवेशकों को अब क्लिनिकल ट्रायल के नतीजों और मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर की ओर से होने वाली सप्लाई पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
