सरकार मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट देने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने घोषणा की है कि सरकार एडवांस्ड मेडिकल टेस्टिंग इक्विपमेंट के लिए **100%** फंडिंग मुहैया कराएगी, जिसका मकसद क्वालिटी बढ़ाना और लागत कम करना है।
टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती
Pharma MachTech और LabNext Expo 2026 के दौरान मंत्री ने बताया कि यह पहल घरेलू कंपनियों को साझा प्रयोगशालाएं (Shared Labs) स्थापित करने में मदद करेगी। Bureau of Indian Standards (BIS) के तहत इस इंफ्रास्ट्रक्चर को तैयार किया जाएगा। इससे उन छोटी और मध्यम कंपनियों को बड़ा फायदा होगा जो महंगे टेस्टिंग सेटअप के कारण पीछे रह जाती थीं। अब वे इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स के हिसाब से अपने प्रोडक्ट्स को सर्टिफाई करवा सकेंगी।
आयात पर निर्भरता कम करने की तैयारी
सरकार का सीधा लक्ष्य भारत को मेडिकल इनोवेशन का ग्लोबल हब बनाना है। इसके लिए मंत्री ने कंपनियों को केवल असेंबली से आगे बढ़कर रिसर्च, डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करने की सलाह दी है। इसके साथ ही, IP (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) फ्रेमवर्क को भी मजबूत किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्लोबल निवेश भारत आए।
निवेशकों के लिए काम की बात
फिलहाल यह एक पॉलिसी अनाउंसमेंट है, न कि किसी विशेष कंपनी के लिए कोई सीधा फाइनेंशियल स्टिमुलस। मार्केट के नजरिए से, यह देखना जरूरी है कि कंपनियां कितनी तेजी से अपने प्रोजेक्ट प्रपोजल्स सरकार के सामने रखती हैं। लॉन्ग टर्म में, जो कंपनियां सरकारी टेस्टिंग फैसिलिटी का लाभ उठाकर अपने एक्सपोर्ट्स बढ़ाएंगी, उन पर नजर रखना फायदेमंद साबित हो सकता है।
