मेडिकल एजुकेशन में खाली सीटों को भरने के लिए केंद्र सरकार ने NEET-SS की क्वालिफाइंग परसेंटाइल को **50%** से घटाकर **30%** कर दिया है। इस फैसले से करीब **6,000** नए उम्मीदवारों को काउंसलिंग में शामिल होने का मौका मिलेगा और **1,857** खाली सीटों को भरने में मदद मिलेगी।
केंद्र सरकार ने 1,857 सुपर-स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों को बर्बाद होने से बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इस बदलाव से काउंसलिंग के 'स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड' (Special Stray Vacancy Round) के लिए करीब 6,000 और उम्मीदवार पात्र हो गए हैं।
तमिलनाडु के लिए बड़ी राहत
इस फैसले का एक अहम हिस्सा तमिलनाडु से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र ने 40 इन-सर्विस (In-service) सीटें राज्य सरकार को लौटाने का निर्णय लिया है। अब तमिलनाडु इन सीटों के लिए अपनी स्वतंत्र काउंसलिंग प्रक्रिया चला सकेगा, जो विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों के लिए आरक्षित हैं।
रिस्क और प्रशासनिक चुनौतियां
हालांकि, सरकार के इस फैसले पर प्रशासनिक स्तर पर चिंताएं भी जताई गई थीं। अधिकारियों का तर्क था कि शैक्षणिक सत्र के इस एडवांस स्टेज पर सीट अपग्रेडेशन की अनुमति देने से 'कैस्केडिंग वैकेंसी इफेक्ट' (Cascading Vacancy Effect) पैदा हो सकता है, जिससे काउंसलिंग खत्म होने के बाद भी सीटें खाली रहने का डर बना रहता है। फिलहाल, तमिलनाडु मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन की कानूनी लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है और मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद तय की गई है।
