Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) नारकोटिक और साइकोट्रोपिक दवाओं पर अपनी निगरानी सख्त करने जा रहा है। मार्च 2027 तक लागू होने वाले इन नियमों से फार्मा कंपनियों की अनुपालन लागत (Compliance Cost) बढ़ सकती है।
सख्त निगरानी की तैयारी
Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) नारकोटिक और साइकोट्रोपिक दवाओं के लिए अपने रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम 'नेशनल कमिटी फॉर कोऑर्डिनेशन ऑन ड्रग ट्रैफिकिंग' की रणनीति का हिस्सा है, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है। सरकार ने इन दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए मार्च 2027 तक का डेडलाइन तय किया है।
फार्मा कंपनियों पर असर
निवेशकों के लिए यह खबर काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा असर सप्लाई चेन और ऑपरेशनल पारदर्शिता पर पड़ेगा। भारत की कई दिग्गज फार्मा कंपनियों का कारोबार Central Nervous System (CNS) थेरेपी, कफ सिरप और पेन मैनेजमेंट दवाओं में है। इन नियमों के लागू होने के बाद कंपनियों को डिजिटल ट्रैकिंग और इंटरनल ऑडिट पर अपना खर्च बढ़ाना पड़ सकता है।
अनुपालन लागत में होगी बढ़त
यह बदलाव फार्मा सेक्टर को एक टेक्नोलॉजी-आधारित निगरानी मॉडल की ओर ले जाएगा। कंपनियों को अब मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से लेकर रिटेल फार्मेसी तक स्टॉक के रियल-टाइम डेटा का रिकॉर्ड रखना होगा। इससे ऑपरेशन्स पर निगरानी बढ़ेगी और ऑडिट्स की संख्या भी ज्यादा हो सकती है, जिससे कंपनियों की अनुपालन लागत (Compliance Cost) में इजाफा होना तय है।
सेक्टर के लिए चेतावनी
ऐतिहासिक रूप से फार्मा सेक्टर में रेगुलेटरी दबाव सप्लाई चेन में अस्थायी रुकावटें पैदा करता रहा है। नई गाइडलाइन्स आने के बाद कंपनियों को अपने डिस्ट्रीब्यूशन प्रोसेस को रीकैलिब्रेट करना होगा। आने वाले अर्निंग्स कॉल्स में निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनियां इन नई अनुपालन शर्तों को अपने मौजूदा बिजनेस में कैसे शामिल कर रही हैं।
