देश की प्रमुख ड्रग रेगुलेटर संस्था CDSCO अब पूरी तरह से हाई-टेक होने की तैयारी में है। दवाइयों के अप्रूवल में लगने वाले समय को कम करने के लिए संस्था आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेगी और **1,500** साइंटिफिक स्टाफ की नियुक्ति करेगी।
डिजिटल रेगुलेशन की ओर कदम
भारत में दवाओं और मेडिकल प्रोडक्ट्स के अप्रूवल का तरीका बदलने वाला है। CDSCO अब एक डिजिटल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार कर रही है। इस काम के लिए संस्था 12 टेक कंपनियों की बिड्स (bids) का मूल्यांकन कर रही है, ताकि एक ऐसा AI-आधारित सिस्टम लाया जा सके जो प्रोसेस को ऑटोमेट कर सके और मानवीय दखल (manual intervention) को कम करे। इससे सरकारी काम में तेजी आने और अप्रूवल की प्रक्रिया पारदर्शी होने की उम्मीद है।
क्यों हो रही है 1,500 लोगों की भर्ती?
फार्मा इंडस्ट्री में सबसे बड़ी समस्या रही है स्टाफ की कमी और एक्सटर्नल एक्सपर्ट्स पर निर्भरता। अब सरकार ने 1,500 नए पदों के लिए मंजूरी दे दी है। अभी तक रिव्यू के लिए बाहरी कमेटियों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे मीटिंग्स में देरी होती थी। अब एक समर्पित इन-हाउस टीम होने से कंपनियों को अप्रूवल की एक निश्चित समय-सीमा (predictable timeline) मिलेगी।
क्लिनिकल ट्रायल का बढ़ता दायरा
नियामक अब क्लिनिकल ट्रायल्स को भी बढ़ावा दे रहे हैं। इस साल ट्रायल्स की संख्या बढ़कर 160 तक पहुंचने का अनुमान है, जो पहले करीब 130 थी। इसके साथ ही, CDSCO बायोलॉजिक्स (biologics) के लिए भी दिशा-निर्देशों में सुधार कर रहा है, जिससे विदेशी कंपनियों का भारत में निवेश करना आसान होगा।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
फार्मा और रिसर्च (CRO) कंपनियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। अब तक सरकारी देरी कंपनियों के प्रॉफिट और रिसर्च प्रोजेक्ट्स की रफ्तार को धीमा करती आई है। हालांकि, इतने बड़े स्तर पर बदलाव के दौरान शुरुआत में कुछ तकनीकी चुनौतियां आ सकती हैं, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी होगी। बाजार अब अगले महीने से इस नए सिस्टम के रोलआउट और अप्रूवल की स्पीड पर पैनी नजर रखेगा।
