स्वास्थ्य सेवा की बड़ी जांच का अंत
कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने दिल्ली के बारह अस्पतालों के खिलाफ करीब दस साल से चल रही जांच को समाप्त कर दिया है। इन अस्पतालों पर आरोप था कि वे बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का गलत फायदा उठा रहे हैं। CCI ने पाया कि अस्पतालों द्वारा मूल्य निर्धारण में अनुचितता साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे। इस फैसले के साथ ही दवाओं, उपभोग्य सामग्रियों और मेडिकल उपकरणों की कीमतों को लेकर चल रही लंबी जांच का अंत हो गया है।
प्रतिस्पर्धा-विरोधी दावों के लिए सबूत अपर्याप्त
CCI ने अपने डायरेक्टर जनरल (DG) की रिपोर्ट की समीक्षा के बाद यह केस बंद किया है। यह असामान्य है कि CCI ऐसे मामलों को सीधे खारिज कर दे, जहाँ शुरुआती जांच में प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन का संकेत मिला हो। आमतौर पर, ऐसे मामलों में आगे की जांच की जाती है।
जांच के दायरे में थे ये अस्पताल
इस जांच में मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (पटपड़गंज, साकेत और शालीमार बाग), बीएलके मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मैक्स मल्टी स्पेशियलिटी सेंटर (पंचशील पार्क और पीतमपुरा), फोर्टिस फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढल हॉस्पिटल, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर लिमिटेड, सर गंगा राम हॉस्पिटल, इंद्रप्रस्थ मेडिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल), सेंट स्टीफंस हॉस्पिटल दिल्ली, और बत्रा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर शामिल थे।
अत्यधिक मूल्य निर्धारण का कानूनी पैमाना पूरा नहीं
यह जांच एक शिकायत के साथ शुरू हुई थी, और नवंबर 2015 व अगस्त 2018 में इसके लिए जांच के आदेश दिए गए थे। DG ने सितंबर 2024 में संशोधित रिपोर्ट पेश की थी। CCI ने कहा कि सबूत प्रभुत्व के दुरुपयोग के कानूनी मानदंडों को पूरा नहीं करते। DG ने 'उच्च कीमतों' और 'महत्वपूर्ण लाभ मार्जिन' के आधार पर संभावित उल्लंघन पाया था। हालांकि, CCI ने स्पष्ट किया कि प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 4 के तहत, कीमत अत्यधिक होने के साथ-साथ अनुचित भी होनी चाहिए। DG अनुचितता साबित करने में विफल रहा, और इसे केवल अधिकता के रूप में गलत समझा, जिसके कारण मामला खारिज हो गया।
बाजार संदर्भ और स्वास्थ्य सेवा की लागत
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की लागत और नियमन पर चर्चा जारी है। जहाँ CCI ने इन अस्पतालों को प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार से बरी कर दिया है, वहीं आम उपभोक्ताओं के लिए स्वास्थ्य सेवा की वहनीयता एक चिंता का विषय बनी हुई है। इस मामले में शामिल नहीं हुए अन्य अस्पताल मौजूदा बाजार स्थितियों के तहत काम करना जारी रखेंगे। CCI के इस फैसले से आरोपी अस्पतालों को कुछ राहत मिल सकती है, हालांकि एक दशक तक चली जांच का असर उनकी सार्वजनिक छवि पर पड़ सकता है।
