सरकार के **₹1 लाख करोड़** के RDI फंड के तहत C-CAMP को 'फोकस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन' के रूप में चुना गया है। इसे शुरुआती तौर पर **₹500 करोड़** का फंड मिलेगा, जिसका लक्ष्य कुल **₹1,000 करोड़** का कंसोर्टियम बनाकर लाइफ साइंस स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाना है।
भारत सरकार ने रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (RDI) फंड के तहत C-CAMP को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इस योजना का उद्देश्य उन स्टार्टअप्स को सहारा देना है जो लैब से निकलकर कमर्शियल बाजार में कदम रख रहे हैं। इस ₹500 करोड़ की शुरुआती सरकारी फंडिंग का इस्तेमाल करके एक बड़ा कंसोर्टियम बनाया जाएगा, जिससे कुल फंडिंग ₹1,000 करोड़ के पार ले जाने की तैयारी है।\n\n### यह फंड क्यों खास है?\n\nअक्सर लाइफ साइंस और डीपटेक स्टार्टअप्स को लैब के बाद के 'कमर्शियल स्केल-अप' चरण में फंड की भारी कमी का सामना करना पड़ता है। इस फंडिंग को 'पेशेंट कैपिटल' (Patient Capital) कहा जा रहा है, क्योंकि ये कंपनियां लंबे समय के विजन के साथ काम करती हैं और इन्हें तुरंत रिटर्न की जगह रिसर्च के लिए बड़े निवेश की जरूरत होती है। C-CAMP पहले भी Eyestem Research और Peptris Technologies जैसी कंपनियों को सपोर्ट कर चुका है, जिससे उम्मीद है कि यह सरकारी निवेश सही दिशा में जाएगा।\n\n### चुनौतियां और उम्मीदें\n\nहालांकि, इस सेक्टर में रिस्क काफी ज्यादा होता है, क्योंकि वैज्ञानिक प्रोजेक्ट्स में देरी और खर्च बढ़ने की संभावना बनी रहती है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि यह कंसोर्टियम कितनी जल्दी बनता है और कैसे इन रिसर्च प्रोजेक्ट्स को सफल बिजनेस में बदला जाता है। सरकार की कोशिश है कि स्वदेशी इनोवेशन को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जाए।
