हेल्थकेयर को इकोनॉमी का ग्रोथ इंजन बनाने की तैयारी
Union Budget 2026 में हेल्थकेयर सेक्टर को सिर्फ एक सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि इकोनॉमिक ग्रोथ का अहम इंजन मानने की पॉलिसी अपनाई गई है। बजट में स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए ₹1,06,530.42 करोड़ का भारी-भरकम आवंटन किया गया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के मुकाबले 9% ज्यादा है। यह कदम देश की मजबूत इकोनॉमिक फंडामेंटल्स, नियंत्रित डेफिसिट और मॉडरेट इन्फ्लेशन के बीच उठाया गया है। बजट में AI, टेक्नोलॉजी, एनर्जी सिक्योरिटी और मिनरल सिक्योरिटी जैसे उभरते क्षेत्रों को राष्ट्रीय विकास से जोड़ने का विजन है। इस घोषणा के बाद 1 फरवरी 2026 को बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी गई, खासकर Apollo Hospitals Enterprises के स्टॉक में 1.59% की इंट्रा-डे तेजी के साथ यह ₹7,069.95 पर पहुंच गया।
मेडिकल टूरिज्म हब और बायोफार्मा पर बड़ा दांव
बजट की सबसे खास पहलों में से एक है पांच रीजनल मेडिकल वैल्यू टूरिज्म (MVT) हब का निर्माण। यह प्राइवेट सेक्टर के साथ मिलकर बनाया जाएगा और इसमें मान्यता प्राप्त हॉस्पिटल्स, डायग्नोस्टिक्स और वेलनेस सेंटर्स को एकीकृत किया जाएगा। इसका मकसद भारत के मेडिकल एक्सपर्टाइज और किफायती इलाज का फायदा उठाकर विदेशी मरीजों को आकर्षित करना है। इससे देश में फॉरेन एक्सचेंज की कमाई बढ़ेगी और भारत एक ग्लोबल हेल्थ डेस्टिनेशन के तौर पर उभरेगा। बता दें कि भारत पहले से ही मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स (MTI) में 10वें स्थान पर है और 2025 में इसका मार्केट $8.7 बिलियन का था, जिसके आगे और बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा, ₹10,000 करोड़ का 'बायोफार्मा SHAKTI' प्रोग्राम पांच सालों में भारत को ग्लोबल बायोफार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में काम करेगा, जिससे बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा।
मेंटल हेल्थ, प्रिवेंटिव केयर और वर्कफोर्स डेवलपमेंट
हेल्थकेयर सेक्टर के विकास के साथ-साथ बजट देश की स्वास्थ्य चुनौतियों और वर्कफोर्स की जरूरतों को भी पूरा करेगा। मेंटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर खास जोर दिया गया है, जिसमें उत्तर भारत में NIMHANS 2.0 की स्थापना का प्रस्ताव है। यह कदम युवाओं में डिजिटल एडिक्शन और स्क्रीन-संबंधित मानसिक समस्याओं पर इकोनॉमिक सर्वे 2026 की चेतावनी के जवाब में है। सरकार मल्टी-स्कििलिंग प्रोग्राम्स के जरिए हेल्थकेयर वर्कफोर्स को मजबूत कर रही है, खासकर जेरियाट्रिक केयरगिवर्स के लिए, ताकि एक फ्लेक्सिबल लेबर पूल तैयार हो सके। इकोनॉमिक सर्वे ने यह भी बताया है कि हेल्थकेयर खर्च का सिर्फ 14% ही प्रिवेंटिव यानी रोकथाम वाले उपायों पर खर्च होता है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही, कस्टम ड्यूटी में छूट देकर जानलेवा बीमारियों की दवाओं को सस्ता बनाने के उपाय भी किए गए हैं।
एक्सपर्ट्स का नज़रिया और Apollo Hospitals का प्रदर्शन
Apollo Hospitals की मैनेजिंग डायरेक्टर, Suneeta Reddy, बजट की पहलों, खासकर MVT हब को, इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानती हैं। उनका मानना है कि हेल्थकेयर सेक्टर ने पिछले चार दशकों में अच्छी तरक्की की है और भविष्य में भी बड़े रिटर्न की उम्मीद है। Apollo Hospitals खुद तेलंगाना में ₹1,700 करोड़ के बड़े निवेश के साथ एडवांस्ड हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर रहा है। 1 फरवरी 2026 तक के मार्केट डेटा के अनुसार, Apollo Hospitals का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹99,910 करोड़ था, P/E रेश्यो लगभग 59.8 और EPS (TTM) 116.30 INR था। एनालिस्ट्स का Apollo Hospitals के लिए अगले 12 महीनों का औसत प्राइस टारगेट INR 8,713.17 है, जो सेक्टर के लिए एक पॉजिटिव लॉन्ग-टर्म आउटलुक दिखाता है।