बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र FDA को Cipla की पुणे फैसिलिटी का लाइसेंस रद्द करने का आदेश वापस लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इसे प्रक्रियात्मक उल्लंघन और अनुचित व्यवहार करार दिया है।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
बॉम्बे हाई कोर्ट ने शनिवार को Cipla और महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के विवाद में दखल देते हुए कंपनी को बड़ी राहत दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंकड की पीठ ने FDA द्वारा पुणे की वाडकी फैसिलिटी का लाइसेंस रद्द करने के आदेश को वापस लेने का निर्देश दिया। कोर्ट ने FDA के रवैये को 'हाई-हैंडेड' (मनमाना) बताते हुए कहा कि छुट्टी के दिन बिना उचित सुनवाई का मौका दिए कार्रवाई करना कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ है।
विवाद की जड़ क्या है?
यह सारा विवाद जून 2026 में हुए एक इंस्पेक्शन से शुरू हुआ था। FDA ने 'Reactin Plus Tablets' की पैकेजिंग पर आपत्ति जताई थी। रेगुलेटर का तर्क था कि लेबल पर 'analgesic' और 'antipyretic' जैसे शब्दों का इस्तेमाल शेड्यूल-H की दवाओं के लिए सेल्फ-मेडिकेशन को बढ़ावा दे सकता है। इसके अलावा, स्टॉक रिकॉर्ड में विसंगतियों और प्रोडक्ट रिकॉल नियमों को लेकर भी चिंताएं जताई गई थीं। हालांकि, Cipla ने स्पष्ट किया है कि इन मुद्दों का दवाओं की क्वालिटी या असर से कोई लेना-देना नहीं है।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है नजर रखना?
भले ही कोर्ट ने प्रक्रिया में सुधार का मौका दिया है, लेकिन मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। FDA को अब कंपनी को एक नया 'शो कॉज नोटिस' जारी करने को कहा गया है, जिसका मतलब है कि प्रशासनिक प्रक्रिया अभी जारी रहेगी। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि Cipla को हाल ही में अगस्त 2026 में पीथमपुर प्लांट के लिए USFDA से भी 7 ऑब्जर्वेशन मिले थे। फार्मा सेक्टर में ऑपरेशनल और रेगुलेटरी कंप्लायंस पर बाजार की नजर बनी रहेगी, इसलिए आगे कंपनी का इन नोटिसों पर कैसे जवाब आता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
