ब्लॉक डील से आई तेजी, पर गहरी चिंताएं बरकरार
सोमवार, 23 फरवरी को Cohance Lifesciences Ltd. के शेयरों में एक बड़ी ब्लॉक डील हुई, जिसने इंट्रा-डे में स्टॉक को 8% तक ऊपर धकेल दिया। इस सौदे में कंपनी के लगभग 2% के बराबर यानी करीब 7.7 मिलियन शेयर ₹235.6 करोड़ में बदले। यह बड़ी ब्लॉक डील अक्सर बड़े संस्थानों के बदलाव का संकेत देती है, लेकिन प्रतिभागियों की पहचान गुप्त होने के कारण बाजार की यह तत्काल सकारात्मक प्रतिक्रिया अटकलों से भरी है। हालांकि, यह मामूली उछाल कंपनी के लिए राहत लेकर नहीं आया है, क्योंकि 2026 में अब तक इसके शेयर का मूल्य 40% से ज्यादा गिर चुका है, जो निवेशकों की गहरी चिंताओं को दर्शाता है।
नियामक जांच और प्रबंधन में उथल-पुथल
शेयरों में आई यह छोटी सी तेजी कंपनी के सामने खड़ी गंभीर समस्याओं को छिपा नहीं सकती। Cohance Lifesciences को हाल ही में USFDA से उसके Nacharam फॉर्मूलेशन प्लांट के लिए एक वार्निंग लेटर मिला है, जिसके कारण शिपमेंट में देरी हुई है और प्लांट को 'Official Action Indicated' (OAI) स्टेटस मिला है। इस नियामक दबाव के साथ-साथ अक्टूबर 2025 के अंत में मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) V Prasada Raju के इस्तीफे ने प्रबंधन में अनिश्चितता पैदा कर दी है। हालांकि, वर्तमान CFO Himanshu Agarwal को होल-टाइम डायरेक्टर नियुक्त किया गया है, लेकिन यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब राजू के जाने के बाद स्टॉक में 10% से अधिक की गिरावट आई थी और यह 52-सप्ताह के निचले स्तर को छू गया था।
तिमाही नतीजे और कमजोर आउटलुक
हालिया तिमाही नतीजों (Q3 FY26) के अनुसार, कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 19.5% गिरा है, और EBITDA मार्जिन भी घटकर 17.5% रह गया है। यह गिरावट मुख्य रूप से ग्राहकों द्वारा इन्वेंटरी एडजस्टमेंट और परिचालन में आई बाधाओं के कारण हुई है। इसके चलते, प्रबंधन ने FY26 के लिए अपने रेवेन्यू अनुमान को भी कम कर दिया है, जो अब 'अर्ध-से-मध्य डबल-डिजिट' की गिरावट का अनुमान लगा रहा है।
वैल्यूएशन पर सवाल और सेक्टर से पिछड़ना
भारतीय फार्मा सेक्टर में जहां FY2026 में 9-11% की ग्रोथ का अनुमान लगाया जा रहा है, वहीं Cohance Lifesciences अपनी विशिष्ट परिचालन और नियामक समस्याओं के कारण पिछड़ता दिख रहा है। कंपनी का TTM P/E (Trailing Twelve Month Price-to-Earnings) रेश्यो 55x के आसपास है, या कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 110x से भी ऊपर है। यह वैल्यूएशन, घटते रेवेन्यू और मार्जिन को देखते हुए, कुछ बड़े प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले काफी प्रीमियम लगता है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
विश्लेषकों की सतर्कता और परिचालन चुनौतियां
कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में उच्च-मार्जिन वाले कमर्शियल उत्पादों से दूरी बनाने और मार्जिन में दबाव के कारण दिक्कतें आई हैं। Nacharam प्लांट में नियामक सुधारों के कारण API+ सेगमेंट में भी देरी हुई है। पिछले 54.4 दिनों से बढ़कर 86.7 दिन हो गए कर्जदार दिनों (debtor days) से वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट में भी चुनौतियां दिखाई देती हैं। कई एनालिस्ट्स इस स्टॉक को लेकर सतर्क हैं। Jefferies ने स्टॉक को 'Hold' पर डाउनग्रेड कर टारगेट प्राइस काफी कम कर दिया है। वहीं, हाल की एक रिपोर्ट में, INR 350 के संशोधित टारगेट के साथ स्टॉक को 'HOLD' रेटिंग दी गई है, जो Q3 FY26 नतीजों की उम्मीदों से कम रहने और FY26 में 10-15% रेवेन्यू गिरावट के अनुमान पर आधारित है।
भविष्य की राह: उम्मीदें और अनिश्चितताएं
Cohance Lifesciences का प्रबंधन अगले वित्त वर्ष (FY27) को एक 'ट्रांजिशन ईयर' के तौर पर देख रहा है। उन्हें उम्मीद है कि API सेगमेंट में स्थिरता, पाइपलाइन का परिपक्व होना और नए ग्राहक मिलने से रिकवरी को गति मिलेगी। कंपनी Antibody-Drug Conjugates (ADCs) जैसे नए क्षेत्रों में निवेश भी कर रही है। हालांकि, निकट भविष्य में कंपनी की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की समस्याओं का समाधान कितनी जल्दी करती है, CDMO बिजनेस को कैसे स्थिर करती है, और नए नेतृत्व में रणनीतिक योजनाओं को कितनी कुशलता से लागू करती है।