Biocon की चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने भारतीय फार्मा कंपनियों को जेनेरिक दवाओं के बजाय हाई-वैल्यू इनोवेशन पर फोकस करने की सलाह दी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब Biocon का शेयर अपने **52-वीक लो** के करीब ट्रेड कर रहा है और निवेशक मार्जिन को लेकर चिंतित हैं।
फार्मा सेक्टर में बड़े बदलाव की आहट
Indian Foundation for Quality Management (IFQM) Symposium 2026 में बोलते हुए, Biocon और Syngene International की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने कहा कि भारत की पहचान सिर्फ 'जेनेरिक दवाओं' के सप्लायर के तौर पर काफी नहीं है। अब वक्त आ गया है कि देश हाई-वैल्यू ड्रग डेवलपमेंट का हब बने।
इनोवेशन की राह और चुनौतियां
किरण मजूमदार-शॉ का मानना है कि इनोवेशन के लिए सिर्फ बिजनेस मॉडल बदलना काफी नहीं है, बल्कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में भारी निवेश की जरूरत है। उन्होंने चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के रेग्युलेटरी सिस्टम का उदाहरण देते हुए कहा कि नई दवाओं के अप्रूवल में तेजी लाने के लिए हमें सिस्टम को और स्मार्ट बनाना होगा। इसके साथ ही, उन्होंने दवा निर्माण में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) के इस्तेमाल पर भी जोर दिया।
निवेशकों के लिए चिंता और रिस्क
मौजूदा स्थिति में Biocon के निवेशक काफी सतर्क हैं। कंपनी का शेयर फिलहाल ₹344 से ₹347 की रेंज में, यानी अपने 52-वीक लो के करीब कारोबार कर रहा है। निवेशकों को कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन और अर्निंग्स में दिख रही अस्थिरता (Volatility) की फिक्र है।
हाई-वैल्यू ड्रग्स बनाने में न केवल भारी लागत लगती है, बल्कि इसमें 'एग्जीक्यूशन रिस्क' भी काफी ज्यादा होता है। फिलहाल, Biocon के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि बिना बैलेंस शीट पर दबाव डाले R&D का खर्च कैसे निकाला जाए। मार्केट की नजर इस बात पर है कि कंपनी अमेरिका में Aflibercept जैसे अपने नए एसेट्स को कैसे लॉन्च करती है और कॉम्पिटिशन के सामने खुद को कैसे टिकाये रखती है। आने वाली तिमाहियों में मार्जिन में सुधार और नए प्रॉडक्ट्स का प्रदर्शन ही इस शेयर की दिशा तय करेगा।
