'इन-लाइसेंसिंग' से स्पीड पकड़ेगी Biocon
Biocon अपनी बायोसिमिलर दवाओं की रेंज को तेजी से बढ़ाने के लिए नई 'इन-लाइसेंसिंग' डील्स की तलाश में है। इस नई रणनीति का मकसद है कि कंपनी अपने ग्लोबल सेल्स नेटवर्क का इस्तेमाल करके, दवाओं को इंटरनली डेवलप करने के लंबे और महंगे प्रोसेस के बजाय, जल्दी बाजार में ला सके। कंपनी की CEO, श्रीहास तांबे (Shreehas Tambe) ने कहा है कि Biocon ऐसी बाहरी दवाओं को खरीदने के लिए तैयार है जो उसकी मौजूदा क्षमताओं के अनुरूप हों, जिससे इंटरनल ग्रोथ के साथ-साथ एक्सटर्नल ग्रोथ का एक मिक्स तैयार हो सके।
यह कदम कंपनी के R&D और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं में बड़े निवेश और Viatris के ग्लोबल बायोसिमिलर बिजनेस के दिसंबर 2023 में पूर्ण इंटीग्रेशन के बाद आया है। Biocon अब अपने बड़े कमर्शियल प्रेजेंस, जो अमेरिका, यूरोप, जापान और 70 से ज़्यादा देशों में फैला है, का उपयोग दूसरी कंपनियों के प्रोडक्ट्स को बेचने और डिस्ट्रीब्यूट करने के लिए करेगी। यह उसके मौजूदा 12 बायोसिमिलर प्रोडक्ट्स को कॉम्प्लीमेंट करेगा, जिन्हें हर साल लाखों मरीज इस्तेमाल करते हैं।
फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में, Biocon के बायोसिमिलर बिजनेस ने ₹10,431 करोड़ का रेवेन्यू जेनरेट किया, जो पिछले साल की तुलना में 16% ज़्यादा है। इस दौरान EBITDA मार्जिन्स लगभग 26% रहे, और मैनेजमेंट को उम्मीद है कि यह जल्द ही 30% तक पहुंच जाएंगे। भारी निवेश पर कम ध्यान देकर और बाहरी एसेट्स पर ज़्यादा फोकस करके, Biocon अपनी फैसिलिटीज के बेहतर इस्तेमाल, प्रॉफिट मार्जिन्स में सुधार और निवेशकों के लिए बेहतर रिटर्न का लक्ष्य रखती है।
बढ़ता कॉम्पिटिशन और धीमी रफ्तार
हालांकि, बायोसिमिलर मार्केट में कॉम्पिटिशन बहुत तेजी से बढ़ रहा है। ग्लोबल बायोसिमिलर मार्केट के 13.3% की CAGR से 2030 तक बढ़ने का अनुमान है, लेकिन यह बहुत भीड़भाड़ वाला भी हो रहा है। Sandoz, Pfizer और Amgen जैसी कंपनियां पहले से ही बड़ा मार्केट शेयर रखती हैं, जो Biocon को बाहर से प्रोडक्ट लाने के लिए मजबूर कर रहा है। Biocon दुनिया की टॉप 5 बायोसिमिलर कंपनियों में से एक है और इंसुलिन में टॉप 3 में।
लेकिन, अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में, जो Biocon के बायोसिमिलर रेवेन्यू का 60% से ज़्यादा हिस्सा देता है, उम्मीद से धीमी रफ्तार से एडॉप्शन हो रहा है। 2023 के अंत तक अमेरिका में बायोसिमिलर का मार्केट शेयर करीब 2% था। यह धीमी रफ्तार, जिसे कुछ लोग 'मैराथन' बता रहे हैं, नई चुनौतियां पैदा करती है। रेगुलेटरी बदलाव और ओरिजिनल दवाओं के पेटेंट खत्म होने पर बढ़ती प्राइस कॉम्पिटिशन इन मुश्किलों को और बढ़ा रही है।
वैल्यूएशन, मार्जिन और FDA की चिंताएं
इन सब कोशिशों के बावजूद, Biocon को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मई 2026 तक, कंपनी का P/E रेशियो 160-167 के आसपास था, जो इंडस्ट्री एवरेज 43 की तुलना में काफी ज्यादा है। यह भविष्य में ग्रोथ को लेकर भारी उम्मीदें दिखाता है, जिन्हें पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो लगभग 0.85 (या 50%) है, जो मॉडरेट डेट का संकेत देता है जिसे नई डील्स के लिए सावधानी से मैनेज करना होगा। प्रॉफिटेबिलिटी भी एक चिंता का विषय बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Biocon का मौजूदा मॉडल शेयरहोल्डर वैल्यू को पर्याप्त रूप से जेनरेट नहीं कर पा रहा है, जिसका अंदाज़ा 5-साल के एवरेज ROE (Return on Equity) 5.62% और ROCE (Return on Capital Employed) 4.36% से लगाया जा सकता है, जो इंडस्ट्री एवरेज से काफी नीचे हैं। इसका इंटरेस्ट कवरेज भी 2x EBIT पर टाइट है।
Viatris बिजनेस का इंटीग्रेशन भी जटिल और महंगा साबित हुआ है, जिससे मार्जिन पर और दबाव बढ़ा है। इसके अलावा, Biocon की बेंगलुरु और मलेशिया स्थित मैन्युफैक्चरिंग साइट्स पर हुई पिछली FDA (Food and Drug Administration) इंस्पेक्शंस ने भी चिंताएं खड़ी की हैं। इन निरीक्षणों से रेगुलेटरी देरी या जरूरी सुधारों का जोखिम पैदा होता है, जो लॉन्च शेड्यूल और लागतों को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिकी बायोसिमिलर बाजार में भयंकर प्राइस कॉम्पिटिशन और संभावित पेटेंट मुकदमे भविष्य के रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा करते हैं।
आगे क्या? प्रॉफिटेबिलिटी और नए बाजार
भारी निवेश और क्षमता निर्माण के दौर के बाद, Biocon अब अपनी फैसिलिटीज के बेहतर इस्तेमाल, प्रॉफिट मार्जिन्स बढ़ाने और निवेश पर रिटर्न को बेहतर बनाने को प्राथमिकता दे रही है। FY26 के लिए, कंपनी ने 13% रेवेन्यू ग्रोथ के साथ ₹16,927 करोड़ का रेवेन्यू रिपोर्ट किया। हालांकि, नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 74% घटकर ₹368.8 करोड़ रह गया। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि हाल ही में लॉन्च हुए नए बायोसिमिलर प्रोडक्ट्स FY27 में ग्रोथ दिखाएंगे, जिसमें स्थिर और लाभदायक विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। FY27 के लिए 'Preserve' फेज से 'Consolidation' फेज में यह बदलाव ऑपरेशनल एफिशिएंसी और बेहतर प्रॉफिट पर ध्यान केंद्रित करके बिजनेस को लंबी अवधि की सफलता के लिए तैयार करने का इरादा रखता है। Biocon भविष्य को देखते हुए GLP-1s और Peptides जैसे नए ड्रग मार्केट्स में भी विस्तार कर रही है, जो डायबिटीज और ओबेसिटी के इलाज में भविष्य की क्षमता को पहचानती है।
