Biocon Share Price: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! Q3 में कंपनी का मुनाफा **475%** धुआंधार बढ़ा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Biocon Share Price: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! Q3 में कंपनी का मुनाफा **475%** धुआंधार बढ़ा
Overview

Biocon ने Q3 FY26 के नतीजे पेश कर दिए हैं, जिसमें कंपनी के नेट प्रॉफिट में **475%** का शानदार उछाल देखने को मिला है। कुल रेवेन्यू भी **11%** बढ़कर **₹4,290 करोड़** हो गया है।

Biocon के लिए Q3 FY26 के नतीजे बेहद मजबूत रहे हैं। कंपनी ने कुल रेवेन्यू में 11% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की, जो ₹4,290 करोड़ पर पहुंच गया। सबसे बड़ी बात यह रही कि नेट प्रॉफिट में 475% का जबरदस्त उछाल आया और यह ₹144 करोड़ हो गया। इसके साथ ही, कंपनी का EBITDA भी 21% बढ़कर ₹951 करोड़ रहा, जो कि कंपनी के बेहतर ऑपरेशनल परफॉरमेंस को दिखाता है।

इस ग्रोथ के पीछे Generics सेगमेंट का अहम योगदान रहा, जिसने रेवेन्यू में 24% की जोरदार ग्रोथ हासिल की। Biosimilars सेगमेंट ने भी 9% की बढ़ोतरी दर्ज की। हालांकि, CRDMO सेगमेंट में कंपनी को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसके चलते इसके रेवेन्यू में गिरावट आई।

कंपनी अपनी Biocon Biologics Limited (BBL) को पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी के तौर पर इंटीग्रेट करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। उम्मीद है कि यह इंटीग्रेशन 31 मार्च, 2026 तक पूरा हो जाएगा। इस बड़े कदम का मुख्य उद्देश्य कंपनी की कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर को और आसान बनाना और विभिन्न ऑपरेशंस से तालमेल (synergies) को बढ़ाना है।

इस इंटीग्रेशन से एक unified, globally scaled biopharmaceutical प्लेटफॉर्म तैयार होने की उम्मीद है। यह कंपनी के स्ट्रक्चर को सरल बनाएगा, मर्जर से जुड़े कर्ज को कम करके फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाएगा और कंपनी की वैल्यूएशन में सुधार कर सकता है।

Biocon, Biosimilars, Generics और CRDMO (कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग) में एक्टिव है। कंपनी ने FY25 में ₹300 करोड़ की सालाना इंटरेस्ट कॉस्ट की बचत भी की है। Proforma 9M FY26 के अंत तक, Net Debt/EBITDA 2.8x था। Q3 FY26 में सेगमेंट-वाइज रेवेन्यू की बात करें तो Biosimilars से ₹2,497 करोड़, Generics से ₹851 करोड़ और CRDMO से ₹917 करोड़ आए।

आगे चलकर, निवेशकों को BBL इंटीग्रेशन की प्रगति, CRDMO सेगमेंट के सामान्य होने, नए प्रोडक्ट्स की लॉन्चिंग और फाइनेंशियल मेट्रिक्स में सुधार पर नज़र रखनी चाहिए। हालांकि, फार्मा सेक्टर में रेगुलेटरी स्क्रूटनी और बाज़ार में कड़ी प्रतिस्पर्धा जैसे जोखिम बने हुए हैं।

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