Biocon Limited के लिए Q3 FY26 के नतीजे थोड़ी मिली-जुली तस्वीर पेश कर रहे हैं।
स्टैंडअलोन परफॉरमेंस पर एक नज़र:
कंपनी के स्टैंडअलोन रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 10.38% की बढ़ोतरी हुई, जो ₹6,213 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि, नेट प्रॉफिट के मोर्चे पर कंपनी को ₹764 करोड़ का शुद्ध घाटा (Net Loss) हुआ। यह घाटा मुख्य रूप से पिछले साल की Q3 FY25 में Syngene के शेयर बेचने से हुए ₹6,075 करोड़ के बड़े एक्सेप्शनल गेन की वजह से हुआ, जिसने पिछले साल के नतीजों को काफी बेहतर दिखाया था। अगर इस बड़े एक्सेप्शनल आइटम को हटा दें, तो ऑपरेटिंग प्रॉफिट बिफोर एक्सेप्शनल आइटम्स में 30.45% का शानदार इजाफा देखने को मिला और यह ₹1,118 करोड़ पर पहुंच गया। लेकिन, इस दौरान स्टैंडअलोन ऑपरेटिंग मार्जिन 32.01% से घटकर 23.84% रह गया।
कंसोलिडेटेड नतीजों ने बढ़ाई उम्मीदें:
वहीं, अगर कंसोलिडेटेड लेवल की बात करें, तो तस्वीर काफी सकारात्मक है। रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस 9.20% बढ़कर ₹41,730 करोड़ दर्ज किया गया। शेयरहोल्डर्स को मिलने वाला नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹251 करोड़ की तुलना में चार गुना से भी ज्यादा होकर ₹1,438 करोड़ पर जा पहुंचा। इस बड़ी बढ़ोतरी में इस तिमाही में एक्सेप्शनल आइटम्स का प्रभाव कम होना भी एक वजह है, जबकि पिछली बार Eris Lifesciences के डिवेस्टमेंट से बड़ा गेन मिला था। कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग प्रॉफिट बिफोर एक्सेप्शनल आइटम्स में 63.7% की तगड़ी बढ़ोतरी हुई और यह ₹2,256 करोड़ पर पहुंच गया। नतीजतन, कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग मार्जिन भी 20.51% से सुधरकर 22.78% हो गया।
क्यों दिखा इतना बड़ा अंतर?
असल में, स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट के आंकड़ों में पिछले साल के बड़े एक्सेप्शनल गेन का असर साफ दिख रहा है, जिससे तुलना थोड़ी भ्रामक हो जाती है। लेकिन, कंपनी की अंडरलाइंग ऑपरेशनल परफॉरमेंस, जैसा कि एक्सेप्शनल आइटम्स को हटाकर ऑपरेटिंग प्रॉफिट में हुई बढ़ोतरी से पता चलता है, वह दोनों लेवल पर मजबूत नजर आ रही है। हालांकि, स्टैंडअलोन ऑपरेटिंग मार्जिन में आई गिरावट पर जरूर बारीकी से नजर रखने की जरूरत होगी।
आगे की राह और स्ट्रैटेजिक चाल:
कंपनी के बोर्ड ने Biocon Biologics Limited (BBL) में बचे हुए 2% स्टेक को खरीदने की मंजूरी दे दी है। इस कदम से BBL पूरी तरह से Biocon की अपनी सब्सिडियरी बन जाएगी, जो एक बड़ा स्ट्रैटेजिक मूव है। इस स्ट्रैटेजिक कदम के लिए, कंपनी ने तिमाही नतीजों के बाद ₹41,500 करोड़ का एक बड़ा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) भी सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस QIP से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल BBL के एक्विजिशन और कंपनी के सामान्य कॉर्पोरेट कामों के लिए किया जाएगा। अच्छी बात यह है कि कंसोलिडेटेड डेट/इक्विटी रेशियो 0.63 से घटकर 0.50 हो गया है, जो कंपनी के बेहतर लेवरेज मैनेजमेंट को दर्शाता है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि BBL का इंटीग्रेशन कितनी अच्छी तरह होता है और नए एक्विजिशन के बाद कंपनी पर कितना फाइनेंशियल प्रेशर आता है। भविष्य में कंपनी इन स्ट्रैटेजिक मूव्स को सस्टेन्ड ऑपरेशनल ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी में कैसे बदल पाती है, यह देखना काफी अहम होगा।