Biocon चेयरपर्सन की चेतावनी: भारत बायोटेक रेस में पीछे छूट रहा, फंड और रेगुलेशन बने रोड़ा!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Biocon चेयरपर्सन की चेतावनी: भारत बायोटेक रेस में पीछे छूट रहा, फंड और रेगुलेशन बने रोड़ा!
Overview

Biocon की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने भारत के बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। उनका कहना है कि वेंचर कैपिटल (Venture Capital) की कमी, धीमी रेगुलेटरी प्रक्रियाएं और निवेशकों के लिए स्पष्ट एग्जिट प्लान्स की अनुपस्थिति के कारण देश के महत्वपूर्ण इनोवेशन और टॉप टैलेंट विदेश जा रहे हैं।

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भारत का बायोटेक इनोवेशन खतरे में?

किरण मजूमदार-शॉ ने साफ कहा है कि भारत में बायोटेक सेक्टर गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। उनका मानना है कि पर्याप्त वेंचर फंडिंग न मिलना, रेगुलेटरी अप्रूवल में देरी और निवेशकों के लिए पैसे निकालने (एग्जिट) के स्पष्ट रास्ते न होना, देश के सबसे होनहार इनोवेशन को दूसरे देशों में जाने पर मजबूर कर रहा है। इस 'इनोवेशन ड्रेन' (Innovation Drain) से भारत ग्लोबल बायोटेक्नोलॉजी मार्केट में अपनी लीड खो सकता है।

शुरुआती स्टेज के बायोटेक के लिए फंड की भारी कमी

बायोटेक सेक्टर में रिसर्च से लेकर मार्केट में प्रोडक्ट लाने तक का सफर लंबा और बेहद खर्चीला होता है। भारत में शुरुआती स्टेज की बायोटेक कंपनियों को वेंचर कैपिटल (Venture Capital) जुटाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके उलट, अमेरिका जैसे देश निवेशकों को शुरुआती चरण में ही लिक्विडिटी (Liquidity) और सपोर्ट का एक मजबूत इकोसिस्टम प्रदान करते हैं। यही वजह है कि कई भारतीय बायोटेक स्टार्टअप्स फंड की तलाश में विदेश का रुख कर रहे हैं। 2024 में अमेरिका में हेल्थकेयर वेंचर फंडिंग $23 बिलियन तक पहुंच गई, जबकि भारत में VC इन्वेस्टमेंट को बायोटेक की खास जरूरतों को पूरा करना होगा।

चीन की तेज रफ्तार भारत के लिए बड़ी चुनौती

चीन तेजी से फार्मास्युटिकल इनोवेशन में एक बड़ा खिलाड़ी बनकर उभर रहा है। सरकार के भारी समर्थन और तेज क्लिनिकल ट्रायल्स के दम पर चीन नई दवाओं की रिसर्च और डेवलपमेंट में आगे है। चीन ग्लोबल बायोलॉजिक्स (Biologics) मार्केट पर हावी होता दिख रहा है, जो हाल के प्रोजेक्ट्स में 50% से ज्यादा हिस्सेदारी रखता है। 2023 में चीन की नई दवा अप्रूवल में बायोलॉजिक्स का हिस्सा 42% था, जो 2015 में सिर्फ 9% था। यह भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है, जहां अभी भी फंडामेंटल सुधारों की सख्त जरूरत है।

Biocon की स्थिति और भविष्य की राह

Biocon का मार्केट कैप फिलहाल ₹55,100 करोड़ से ₹57,700 करोड़ के बीच है, लेकिन इसका P/E रेश्यो इंडस्ट्री एवरेज 31 की तुलना में 90-95 गुना है। पिछले फाइनेंशियल ईयर 2025 में कंपनी का रेवेन्यू 3% बढ़कर ₹15,262 करोड़ रहा, जबकि EBITDA मार्जिन 21.3% था। कंपनी के बायोसिमिलर बिजनेस की अमेरिका और यूरोप में अच्छी मांग है। हालांकि, Biocon का रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) हाल ही में 4.76% से 5.48% के आसपास रहा है, जो वैल्यूएशन के हिसाब से काफी कम है।

किरण मजूमदार-शॉ ने जोर देकर कहा कि सिर्फ कंपनियों की उपलब्धियां काफी नहीं हैं। भारत को ग्लोबल लीडर बनने के लिए वेंचर कैपिटल की भागीदारी बढ़ानी होगी, लिस्टिंग के नियम आसान करने होंगे और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को तेज करना होगा। अगर इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो भारत बायोटेक्नोलॉजी इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी पकड़ खो सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.