Bio-Med Rabies Vaccine: कड़ा झटका! Kasauli लैब में फेल हुई वैक्सीन, बाजार में नहीं आएगी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Bio-Med Rabies Vaccine: कड़ा झटका! Kasauli लैब में फेल हुई वैक्सीन, बाजार में नहीं आएगी

भारत की सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी (CDL) ने Bio-Med Pvt. Ltd. द्वारा बनाई गई रैबीज वैक्सीन SURE RAB का एक बैच सुरक्षा मानकों पर खरा न उतरने के कारण रिजेक्ट कर दिया है। रेगुलेटर ने बैक्टीरियल एंडोटॉक्सिन और बोवाइन सीरम एल्ब्यूमिन के स्तर में गड़बड़ी पाई, जिससे यह खराब डोज बाजार में नहीं पहुंच पाएगी।

Kasauli लैब में टेस्टिंग के दौरान खुला राज

गाजियाबाद स्थित Bio-Med Pvt. Ltd. की मानव रैबीज वैक्सीन के एक विशेष बैच को कसौली की सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी (CDL) ने खारिज कर दिया है। यह फैसला बैच R011125 के अनिवार्य सुरक्षा जांच में फेल होने के बाद आया है। वैक्सीन, जिसे SURE RAB के नाम से जाना जाता है, बैक्टीरियल एंडोटॉक्सिन और बोवाइन सीरम एल्ब्यूमिन के टेस्ट में फेल हुई। ये जांचें यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि उत्पाद हानिकारक बैक्टीरियल संदूषकों से मुक्त है और इसमें मौजूद पशु प्रोटीन सुरक्षित सीमा के भीतर हैं।

बाजार में आने से पहले ही रोकी गई सप्लाई

यह बैच नवंबर 2025 में निर्मित हुआ था और इसकी एक्सपायरी डेट अक्टूबर 2028 थी। CDL द्वारा 30 जून को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, यह बैच आवश्यक फार्माकोपिया मानकों का पालन नहीं करता था। चूंकि ये टेस्ट 'टेस्ट-एंड-रिलीज' प्रोटोकॉल का अनिवार्य हिस्सा हैं, इसलिए रेगुलेटर ने समस्या की पहचान तब कर ली जब डोज मरीजों या आम बाजार तक नहीं पहुंची थी। रिजेक्ट किए गए बैच को आधिकारिक निपटान दिशानिर्देशों के अनुसार नष्ट कर दिया गया है।

रैबीज वैक्सीन बाजार पर क्या होगा असर?

भारत में रैबीज एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जहां सालाना लाखों कुत्तों के काटने के मामले सामने आते हैं। रैबीज वैक्सीन का घरेलू बाजार लगभग ₹125 करोड़ का अनुमानित है। Bio-Med इस बाजार में सक्रिय है, लेकिन इसका मुकाबला सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, भारत बायोटेक और इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स जैसे बड़े घरेलू खिलाड़ियों से है।

Bio-Med के मैनेजिंग डायरेक्टर एस.पी. गर्ग ने कहा है कि गुणवत्ता की यह समस्या सिर्फ इस विशेष बैच तक सीमित है और यह कंपनी के बाकी उत्पादन को नहीं दर्शाती। कंपनी अन्य बैचों का उत्पादन जारी रखे हुए है जो नियामक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। उद्योग पर्यवेक्षकों का मानना है कि जहां इस रिजेक्शन से एक बैच के लिए सुरक्षा चिंताएं सामने आती हैं, वहीं यह भारत की नियामक निगरानी प्रणाली के प्रभावी ढंग से काम करने का भी प्रमाण है, जो मरीजों के लिए जोखिम पैदा करने से पहले गुणवत्ता की खामियों को पकड़ लेती है।

आगे की निगरानी

निवेशकों और जन स्वास्थ्य पर नजर रखने वालों के लिए, कंपनी की आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित रहेगा। भविष्य में, बैच की विफलताओं को रोकने के लिए कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग पर ओवरसाइट की प्रभावशीलता एक महत्वपूर्ण निगरानी योग्य बिंदु होगी। इसके अतिरिक्त, DCGI से विस्तृत फैसिलिटी ऑडिट या सुधारात्मक कार्रवाइयों के बारे में कोई भी अपडेट इस स्थिति में अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा।

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