ग्लोबल दिग्गज Bayer AG ने भारत में अपने कंज्यूमर हेल्थ कारोबार को 2030 तक तीन गुना करने की योजना बनाई है। कंपनी वेट-लॉस दवाओं के साइड-इफेक्ट्स को मैनेज करने वाले प्रोडक्ट्स पर फोकस करेगी। ध्यान दें, यह पैरेंट कंपनी की पहल है और इसका BSE लिस्टेड Bayer CropScience से सीधा संबंध नहीं है।
भारत पर है नजरें
फार्मा दिग्गज Bayer AG भारत को अपने टॉप-5 कंज्यूमर हेल्थ मार्केट्स में से एक मान रही है। कंपनी का लक्ष्य इसे दुनिया भर में अपना तीसरा सबसे बड़ा बाजार बनाना है। कंपनी का मुख्य फोकस उन लोगों के लिए प्रोडक्ट्स लाना है, जो वेट-लॉस दवाओं (GLP-1) के कारण होने वाली समस्याओं जैसे मतली, कब्ज और मांसपेशियों की कमजोरी से जूझ रहे हैं।
निवेशकों के लिए जरूरी सावधानी
भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों को यह समझना होगा कि यह विस्तार पैरेंट कंपनी Bayer AG का हिस्सा है। भारत में लिस्टेड Bayer CropScience का मुख्य काम क्रॉप प्रोटेक्शन, सीड्स और डिजिटल फार्मिंग है। ये दोनों अलग-अलग बिजनेस मॉडल और स्ट्रैटेजी पर काम करते हैं, इसलिए इन्हें एक न समझें।
ग्लोबल चुनौतियां और नई रणनीति
कंपनी पर भारी कर्ज का बोझ है और 30 जून 2026 तक इसका नेट फाइनेंशियल डेट €33 बिलियन से अधिक रहा है। इसी के चलते कंपनी भारत जैसे हाई-पोटेंशियल मार्केट्स पर दांव लगा रही है ताकि अपने ग्लोबल बैलेंस शीट को मैनेज कर सके।
इस विस्तार के लिए, कंपनी अपने डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क को खुद मजबूत करने जा रही है। साथ ही, भारतीय बाजार की कीमत संवेदनशीलता को देखते हुए कंपनी स्थानीय मैन्युफैक्चरर्स के साथ पार्टनरशिप करने पर भी विचार कर रही है, ताकि प्रीमियम प्रोडक्ट्स के साथ-साथ मास मार्केट तक पहुंच बनाई जा सके।
