'Innovation Full Stack': नवाचार से बाज़ार तक का सफर
BFI का यह नया $50 मिलियन का प्लेटफार्म 'Innovation Full Stack' भारत में बायोमेडिकल और MedTech नवाचार को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। यह पहल भारत की मेडिकल इनोवेशन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने का लक्ष्य रखती है, खासकर प्रोटोटाइपिंग (prototyping), क्लिनिकल वैलिडेशन (clinical validation) और कमर्शियलाइजेशन (commercialization) जैसी ज़रूरी कड़ी में।
इस प्लेटफार्म के ज़रिए देश भर की रिसर्च संस्थानों, हॉस्पिटल्स और एक्सलरेटर्स (accelerators) को आपस में जोड़ा जाएगा। प्रमुख पार्टनर में IIT दिल्ली, AIIMS दिल्ली, AIIMS जोधपुर, AIIMS पटना, VMMC और सफदरजंग हॉस्पिटल, सेंट जोंस मेडिकल कॉलेज, वेंचर सेंटर और IKP नॉलेज पार्क जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं शामिल हैं। यह नेटवर्क क्लिनिकल वैलिडेशन के लिए सुविधाओं की कमी और फंडिंग की समस्या को दूर करेगा, जो अक्सर प्रोटोटाइप बनने के बाद अच्छे आइडियाज़ को अटकल देते हैं। 'Innovation Full Stack' नए प्रोडक्ट्स की बिक्री और मार्केटिंग के रास्तों को भी बेहतर बनाएगा।
Blockchain For Impact के फाउंडर संदीप नाइलवाल ने कहा कि यह पहल उन कई अच्छे बायोमेडिकल और MedTech आइडियाज़ को सफल बनाने के लिए है, जो इनोवेटर्स के अकेले संघर्ष करने के कारण दम तोड़ देते हैं। BFI का यह प्लेटफार्म विश्वविद्यालयों, डॉक्टरों, बिजनेस एक्सलरेटर्स और सरकारी निकायों को एक साथ लाकर, आइडिया से मार्केट तक एक स्पष्ट और लगातार सफर प्रदान करता है। इसका एक बड़ा लक्ष्य भारत के इनोवेशन सिस्टम में फंडिंग और रिसोर्सेज को डालना है, ताकि देश की 80% तक की मेडिकल हार्डवेयर ज़रूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम हो सके।
भारतीय MedTech मार्केट का सुनहरे भविष्य की ओर कदम
भारत का मेडिकल डिवाइस मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2030 तक यह $50 बिलियन तक पहुंच सकता है, जिसमें सालाना लगभग 19% से 26.9% की वृद्धि की उम्मीद है। बढ़ती पुरानी बीमारियां, स्वास्थ्य खर्चों में वृद्धि और सरकारी समर्थन इस ग्रोथ के मुख्य कारण हैं। नेशनल मेडिकल डिवाइस पॉलिसी 2023 का लक्ष्य 25 सालों में भारत की ग्लोबल मार्केट हिस्सेदारी को 1.6% से बढ़ाकर 10-12% करना है। प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत घरेलू उत्पादन के लिए पहले ही काफी निवेश आ चुका है। हालांकि, अभी भी देश विशेष रूप से जटिल और हाई-वैल्यू वाले उपकरणों के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, जहां आयात का मूल्य निर्यात से दोगुना से भी अधिक है।
भारत के नवाचार नेटवर्क को जोड़ना
BFI का 'Innovation Full Stack' प्लेटफार्म देश में तेज़ी से बदलते माहौल में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत में पहले से ही कई MedTech इनक्यूबेटर और एक्सलरेटर मौजूद हैं, लेकिन BFI का मॉडल एक अधिक एकीकृत रास्ता बनाने पर केंद्रित है, जो नवाचार की गति और बाज़ार में स्वीकार्यता को धीमा करने वाली संस्थागत कमजोरियों को सीधे संबोधित करेगा। पॉलीगॉन (Polygon) के सह-संस्थापक रहे संदीप नाइलवाल का यह प्रयास, स्केलेबल टेक प्लेटफार्म और चैरिटेबल प्रोजेक्ट्स बनाने के उनके अनुभव को दर्शाता है। यह पहल 'स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन इन फार्मा MedTech सेक्टर (PRIP)' जैसी सरकारी पहलों के साथ मिलकर राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक होगी।
भारतीय MedTech के सामने चुनौतियाँ
BFI के बड़े लक्ष्यों के बावजूद, घरेलू MedTech नवाचार के सामने कई गंभीर चुनौतियाँ बनी हुई हैं। जहां मार्केट में भारी वृद्धि का अनुमान है, वहीं जटिल उपकरणों जैसे MRI और CT स्कैनर (जिनमें 90% से अधिक आयात पर निर्भरता है) के लिए भारत की उच्च आयात निर्भरता उन्नत विनिर्माण में एक बड़ी कमी को दर्शाती है। रेगुलेटरी मुद्दे और अस्पष्ट नीतियां अभी भी स्टार्टअप्स के लिए बाज़ार में प्रवेश में देरी कर रही हैं, जिससे प्रोडक्ट्स को मार्केट तक पहुंचने में 12 से 18 महीने तक का अतिरिक्त समय लग रहा है। इसके अलावा, भारत में टैलेंट की भी कमी है, खासकर जटिल क्षेत्रों में आवश्यक बायोमेडिकल इंजीनियरों और R&D विशेषज्ञों की संख्या ज़रूरत से कम प्रशिक्षित हो रही है।
भारतीय MedTech के भविष्य का आउटलुक
BFI का 'Innovation Full Stack' प्लेटफार्म भारत के MedTech सेक्टर के लिए एक अहम मोड़ पर आया है। मज़बूत सरकारी समर्थन, एक्सलरेटर्स में बढ़ते प्राइवेट निवेश और महत्वाकांक्षी मार्केट ग्रोथ पूर्वानुमानों के साथ, रणनीतिक पहलों के लिए अनुकूल माहौल बन रहा है। BFI का पूरा ध्यान आइडिया से लेकर मार्केट तक एक सम्पूर्ण रास्ता बनाने पर है, जो प्रोटोटाइप चरण के बाद फंडिंग और कमर्शियलाइजेशन के महत्वपूर्ण अंतर को भरेगा। इस $50 मिलियन के प्लेटफार्म की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कितनी अच्छी तरह वास्तविक सहयोग बना पाता है, जटिल नियमों को सरल बनाता है, और स्थानीय नवाचार को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने तथा महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी आयात पर देश की भारी निर्भरता को कम करने के लिए प्रोत्साहित करता है।