सरकार अपने Ayushman Bharat मिशन के तहत एम्बुलेंस सेवाओं को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़कर इमरजेंसी रिस्पांस को आधुनिक बनाने जा रही है। अब तक **45 करोड़** कार्ड जारी किए जा चुके हैं और फोकस अब ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर है।
भारत सरकार का Ayushman Bharat मिशन अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां जोर एनरोलमेंट से हटकर इमरजेंसी केयर की गुणवत्ता और तेजी पर है। अब तक इस योजना के जरिए 12 करोड़ लोगों का अस्पताल में इलाज हो चुका है, लेकिन अब सरकार एम्बुलेंस नेटवर्क को 'Ayushman Bharat Digital Mission' के साथ इंटीग्रेट करने की योजना बना रही है।
कैसे काम करेगा यह नया मॉडल?
इस नई व्यवस्था के तहत, इमरजेंसी नंबर 112 को रियल-टाइम हॉस्पिटल ऑक्यूपेंसी डेटा से जोड़ा जाएगा। इससे मरीज को 'निकटतम' अस्पताल के बजाय 'सबसे उपयुक्त' अस्पताल में ले जाना आसान होगा, जिससे कार्डियक और एक्सीडेंट जैसे मामलों में कीमती समय बचेगा।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
हेल्थकेयर सेक्टर के निवेशकों के लिए यह एक बड़े बदलाव का संकेत है। PM-RAHAT स्कीम के तहत एक्सीडेंट पीड़ितों को ₹1.5 लाख तक की कैशलेस सुविधा दी जा रही है। अगर भविष्य में इसे सामान्य मेडिकल इमरजेंसी में भी लागू किया जाता है, तो प्राइवेट अस्पतालों का पेपरवर्क कम होगा और वर्किंग कैपिटल साइकिल में सुधार आएगा।
चुनौतियां और जोखिम
हालांकि, योजना का क्रियान्वयन आसान नहीं है। निजी अस्पतालों को इस डिजिटल नेटवर्क से जुड़ने के लिए अपने IT इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना होगा। साथ ही, अगर पेमेंट सेटलमेंट में देरी हुई, तो प्राइवेट अस्पताल इन मरीजों को प्राथमिकता देने में हिचकिचा सकते हैं।
बाजार के जानकारों को अब 2026 में आने वाली 'National Ambulance Service Operational Guidelines' पर नजर रखनी चाहिए, जो इस सेक्टर की दिशा तय करेगी।
