यूनिट-7 में क्या मिला USFDA को?
USFDA की टीम ने 28 जनवरी से 10 फरवरी, 2026 के बीच Aurobindo Pharma की यूनिट-7 का निरीक्षण किया था। इस दौरान, टीम ने कुल 9 ऐसे मुद्दे पाए जो कंपनी की प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उपकरणों की सफाई, कंप्यूटर सिस्टम पर नियंत्रण और निर्माण प्रक्रियाओं के निर्देशों में कमी जैसी बातें सामने आईं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि USFDA ने डेटा इंटीग्रिटी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। आरोप है कि एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट ने सैंपल कलेक्शन का डेटा जानबूझकर गलत तरीके से दर्ज किया। यह रेगुलेटरी मानकों का एक गंभीर उल्लंघन है।
नतीजों पर भी असर
यह खबर कंपनी के हालिया तिमाही नतीजों के बीच आई है, जो मिले-जुले रहे। कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) पिछले साल की तुलना में 8.4% बढ़कर ₹8,646 करोड़ रहा। यूरोप में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली, लेकिन अमेरिका जैसे महत्वपूर्ण बाजार में ग्रोथ सिर्फ 2% रही।
एनालिस्ट्स की राय और भविष्य की चिंताएं
USFDA की इन चिंताओं के चलते Aurobindo Pharma का शेयर ₹1,129.20 के स्तर तक गिर गया। कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि ये "प्रक्रियात्मक" मुद्दे हैं और इनसे वित्तीय या परिचालन गतिविधियों पर असर नहीं पड़ेगा।
हालांकि, भारतीय फार्मा सेक्टर पर USFDA का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। साल 2024 में USFDA ने भारत में 256 से ज्यादा प्लांट्स का निरीक्षण किया है। Aurobindo Pharma का पी/ई (P/E) रेश्यो लगभग 19.0-19.75 है, जो Sun Pharma (लगभग 33.5-37.46) और Cipla (लगभग 21.2-23.87) से कम है, लेकिन Dr. Reddy's (लगभग 17.33-18.9) से थोड़ा ऊपर है।
इस बीच, Sun Pharma और Cipla जैसी कंपनियां भी पहले USFDA की कार्रवाई झेल चुकी हैं। सबसे बड़ी चिंता डेटा इंटीग्रिटी के उल्लंघन को लेकर है, जो किसी भी दवा कंपनी के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकती है। इसके चलते इंपोर्ट बैन (Import Ban), प्रोडक्ट रिकॉल (Product Recall) और नए अप्रूवल में देरी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
आगे क्या?
Aurobindo Pharma को अब USFDA की चिंताओं को दूर करने के लिए एक ठोस एक्शन प्लान पेश करना होगा और तेजी से सुधार दिखाना होगा। विश्लेषक इस प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखेंगे, खासकर अमेरिकी बाजार में सप्लाई चेन पर किसी भी संभावित रुकावट को लेकर।