Apollo Hospitals: मुनाफे में **36%** की शानदार छलांग! फर्टिलिटी यूनिट के मर्जर की भी हुई घोषणा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Apollo Hospitals: मुनाफे में **36%** की शानदार छलांग! फर्टिलिटी यूनिट के मर्जर की भी हुई घोषणा
Overview

Apollo Hospitals Enterprise ने मार्च तिमाही में तगड़ा मुनाफा दर्ज किया है। कंपनी के नेट प्रॉफिट में पिछले साल के मुकाबले **36%** की बढ़त देखी गई है, जो **₹529 करोड़** रहा। वहीं, रेवेन्यू **18%** बढ़कर **₹6,605 करोड़** हो गया। इस ग्रोथ में हॉस्पिटल्स, डायग्नोस्टिक्स और डिजिटल हेल्थ सेवाओं का बड़ा योगदान रहा। इसके साथ ही, कंपनी अपनी फर्टिलिटी सेवाओं को Cloudnine के साथ मर्ज करने की भी योजना बना रही है, जिससे **₹1,550 करोड़** की एक बड़ी हेल्थकेयर कंपनी बनेगी।

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Apollo Hospitals के चौथे क्वार्टर के नतीजे:

Apollo Hospitals Enterprise Ltd. ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 36% बढ़कर ₹529 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, 31 मार्च, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 18% की बढ़ोतरी के साथ ₹6,605 करोड़ दर्ज किया गया। यह ग्रोथ कंपनी के हॉस्पिटल्स, डायग्नोस्टिक्स और डिजिटल हेल्थ सेगमेंट से मिले मजबूत सपोर्ट के कारण संभव हुई। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 की बात करें तो, Apollo Hospitals का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 16% बढ़कर ₹25,229 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट 34% की बढ़ोतरी के साथ ₹1,942 करोड़ हो गया।

फर्टिलिटी सेवाओं का Cloudnine के साथ मर्जर:

एक अहम स्ट्रेटेजिक कदम उठाते हुए, Apollo Hospitals के बोर्ड ने अपनी फर्टिलिटी सेवाओं, Apollo Cradle & Fertility, को Cloudnine के साथ मर्ज करने की मंजूरी दे दी है। इस प्रस्तावित मर्जर को कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) से मंजूरी मिलनी बाकी है। इसका मकसद मैटरनिटी और फर्टिलिटी केयर मार्केट में एक लीडिंग कंपनी तैयार करना है। इस ट्रांजेक्शन का वैल्यूएशन ₹1,550 करोड़ है, जिसमें कैश कंपोनेंट के साथ-साथ Apollo Hospitals को मर्ज की गई कंपनी में 9.9% की हिस्सेदारी भी मिलेगी। यह कदम इंडियन हेल्थकेयर इंडस्ट्री में चल रहे कंसॉलिडेशन (समेकन) के ट्रेंड को दर्शाता है, जहां कंपनियां अपनी मार्केट रीच और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए लगातार मर्ज या एक्वायर कर रही हैं।

ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और डिजिटल हेल्थ ग्रोथ:

कंपनी के मैनेजमेंट ने बताया कि उनके विभिन्न बिजनेस सेगमेंट में ऑपरेशनल परफॉर्मेंस में सुधार हुआ है। स्थापित हॉस्पिटल्स यूनिट्स के लिए EBITDA मार्जिन Q4FY26 में बढ़कर 25.5% हो गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 24.4% था। कंपनी ने अपने ऑनलाइन बिजनेस ऑपरेशंस में कैश बर्न (नुकसान) को कम करने और एफिशिएंसी बढ़ाने में भी सफलता हासिल की है। Apollo HealthCo, जो कि कंपनी का डिजिटल हेल्थ डिविजन है, FY26 में 19% रेवेन्यू ग्रोथ के साथ ₹324 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाने में सफल रहा। वहीं, रिटेल हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक्स यूनिट, Apollo Health and Lifestyle, ने 20% रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की और अपने नुकसान को कम करने में कामयाबी पाई। कंपनी की योजना अपनी फार्मेसी और डिजिटल हेल्थ सेवाओं को डी-मर्ज करके Q4 FY27 तक अलग से लिस्ट करने की है।

मार्केट वैल्यूएशन और सेक्टर आउटलुक:

वर्तमान में Apollo Hospitals एक प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है, जिसका P/E रेश्यो लगभग 64.49 है, जो सेक्टर के दूसरे बड़े प्लेयर्स से ज्यादा है। इसका P/B रेश्यो 12.03 है। इन हाई वैल्यूएशन्स के बावजूद, एनालिस्ट्स का इस स्टॉक पर पॉजिटिव आउटलुक बना हुआ है, और 'स्ट्रॉन्ग बाय' रेटिंग के साथ 12 महीने का एवरेज प्राइस टारगेट संभावित अपसाइड का संकेत दे रहा है। भारतीय हेल्थकेयर सेक्टर में तेजी की उम्मीद है और यह 2026 तक $610 बिलियन से अधिक का हो सकता है। इसका मुख्य कारण बढ़ती आय, बेहतर इंश्योरेंस कवरेज और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों का बढ़ता प्रचलन है। यह सेक्टर 'इंटेलिजेंट हेल्थकेयर' और प्लेटफॉर्म-आधारित सॉल्यूशंस की ओर बढ़ रहा है।

वैल्यूएशन की चिंताएं और इंटीग्रेशन की चुनौतियाँ:

हालांकि Apollo Hospitals मजबूत ग्रोथ और पॉजिटिव सेक्टर आउटलुक दिखा रहा है, लेकिन इसका हाई वैल्यूएशन एक चिंता का विषय बना हुआ है। स्टॉक का P/E रेश्यो 64.49 इंडस्ट्री एवरेज से काफी ऊपर है। लगातार प्रॉफिटेबिलिटी पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा और डिजिटल हेल्थ इनिशिएटिव्स व इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के लिए जरूरी बड़े निवेशों का दबाव पड़ सकता है। कंपनी का एंटरप्राइज वैल्यू टू सेल्स रेश्यो भी ग्लोबल लेवल पर सबसे ऊंचे रेश्यो में से एक है। फर्टिलिटी यूनिट्स का सफल इंटीग्रेशन और अपेक्षित सिनर्जी (तालमेल) का एहसास, प्रस्तावित मर्जर की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा। Apollo Hospitals फिलहाल बहुत छोटा डिविडेंड ऑफर करता है, जो ग्रोथ के लिए कमाई को री-इन्वेस्ट करने पर कंपनी के फोकस को दर्शाता है।

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