Apollo Hospitals: 5800 से ज़्यादा बेड जुड़ेंगे, डिजिटल और फार्मेसी बिज़नेस की होगी अलग लिस्टिंग

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AuthorAditya Rao|Published at:
Apollo Hospitals: 5800 से ज़्यादा बेड जुड़ेंगे, डिजिटल और फार्मेसी बिज़नेस की होगी अलग लिस्टिंग

Apollo Hospitals ने अगले पांच सालों में अपने नेटवर्क में **5,800** से ज़्यादा बेड जोड़ने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, कंपनी अपने डिजिटल और फार्मेसी बिज़नेस को अलग से लिस्ट कराने की भी तैयारी कर रही है। हाल ही में कंपनी ने Q1 FY27 में **34%** मुनाफे में बढ़ोतरी दर्ज की है।

हॉस्पिटल्स का विस्तार

Apollo Hospitals Enterprise Limited ने एक आक्रामक ग्रोथ स्ट्रेटेजी (aggressive growth strategy) का ऐलान किया है। कंपनी का लक्ष्य अगले पांच सालों में अपने हॉस्पिटल नेटवर्क में 5,800 से अधिक बेड क्षमता का इजाफा करना है। यह विस्तार योजना कंपनी के लिए काफी मजबूत साबित हुई है, जिसने 2027 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू (consolidated revenue) में 21% का ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ और 34% की बढ़ोतरी के साथ ₹610.4 करोड़ का आफ्टर-टैक्स प्रॉफिट दर्ज किया है।

कंपनी अपने हॉस्पिटल नेटवर्क को बढ़ाने पर फोकस कर रही है। हाल ही में बेंगलुरु के सरजापुर में 180 बेड की एक नई फैसिलिटी शुरू की गई है। इसके अलावा, दिल्ली, हैदराबाद, रांची, Indore और Guwahati जैसे प्रमुख शहरों में भी विस्तार की योजनाएं हैं। इस स्ट्रेटेजी का एक बड़ा हिस्सा एडवांस्ड कैंसर-केयर सेंटर्स (advanced cancer-care centers) का विकास है, जिसमें दिल्ली और हैदराबाद में प्रोटॉन थेरेपी (proton therapy) की सुविधा वाले प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं।

डिजिटल और फार्मेसी बिज़नेस की रीस्ट्रक्चरिंग

अपने हॉस्पिटल विस्तार के साथ-साथ, Apollo अपने डिजिटल हेल्थ और फार्मेसी बिज़नेस को रीऑर्गेनज (reorganize) करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। इस योजना के तहत Apollo 24/7 और फार्मेसी डिवीज़न (pharmacy division) को एक नई इकाई में अलग किया जाएगा। जून 2026 तक शेयरधारकों (shareholders) और क्रेडिटर्स (creditors) ने इस स्कीम को मंजूरी दे दी है। यह रीस्ट्रक्चरिंग, डिजिटल और फार्मेसी बिज़नेस की संभावित इंडिपेंडेंट लिस्टिंग (independent listing) की ओर एक बड़ा कदम है, जिससे शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉक (unlock value) हो सकती है। कंपनी इस प्रक्रिया को FY27 की चौथी तिमाही तक पूरा करने का लक्ष्य रखती है, जो रेगुलेटरी क्लीयरेंस (regulatory clearances) पर निर्भर करेगा।

फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और रिस्क

FY27 की पहली तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन (operating margins) बढ़कर 15.5% हो गया है। हालांकि, निवेशक नए क्षमता विस्तार से पड़ने वाले फाइनेंशियल इम्पैक्ट (financial impact) पर नज़र बनाए हुए हैं। किसी भी हेल्थकेयर प्रोवाइडर की तरह, नए हॉस्पिटल्स खोलने में शुरुआती लागत का दबाव होता है। हाल की तिमाही में, 380 बेड वाली नई यूनिट्स ने ₹38 करोड़ का EBITDA लॉस (EBITDA loss) दर्ज किया। यह एक आम चरण है, क्योंकि नए शुरू हुए हॉस्पिटल्स को पूरी क्षमता तक पहुंचने और पेशेंट इंटेक (patient intake) को स्थिर करने में समय लगता है।

भविष्य में, कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बड़े पैमाने पर बेड की संख्या बढ़ाने के काम को एग्जीक्यूट (execute) करना है, बिना ज़्यादा कर्ज का दबाव बनाए। 30 जून 2026 तक कंपनी पर ₹7,481 मिलियन का नेट डेट (net debt) था। कंपनी को अपने विस्तार प्रोजेक्ट्स के फंडिंग की ज़रूरतों को अपने ऑपरेशनल कैश फ्लो (operational cash flow) के साथ बैलेंस करना होगा। शेयरधारकों के लिए अगले महत्वपूर्ण कदम सरजापुर में नए चालू किए गए बेड का ऑपरेशनल रैंप-अप (operational ramp-up) और डिजिटल बिज़नेस डीमर्जर (demerger) के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल (regulatory approvals) की प्रगति होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.