Andhra Pradesh के Polavaram जिले में एक सरकारी मलेरिया-विरोधी दवा कैंप के दौरान दर्दनाक घटना सामने आई है। दवा लेने के बाद 7 साल की बच्ची की जान चली गई और **50** से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
Polavaram जिले के Gollaguppa गांव में एक स्वास्थ्य कैंप का आयोजन किया गया था, जिसका मकसद इलाके में मलेरिया के प्रसार को रोकना था। कैंप में मौजूद लोगों को 'क्लोरोक्वीन' (Chloroquine) दवा दी गई, लेकिन इसे लेने के कुछ देर बाद ही लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। कई बच्चों को बेहोशी और ब्लड शुगर लेवल गिरने जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस दुखद घटना में 7 साल की Madivi Jamuna की जान चली गई।
सरकारी जांच और एक्शन प्लान
Andhra Pradesh के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित दवा के उस पूरे बैच को जब्त कर लिया है और उसे Vizag Forensic Laboratory में क्वालिटी-कंट्रोल जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह दवा के बैच में कोई खराबी थी या फिर मरीजों की किसी मौजूदा स्वास्थ्य समस्या के साथ दवा का गलत रिएक्शन हुआ।
हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर पर असर
यह घटना हेल्थकेयर सेक्टर के लिए एक बड़ा सबक है। सरकारी प्रोक्योरमेंट और फार्मा सप्लाई चेन की इंटीग्रिटी पर अब कड़े सवाल उठाए जा रहे हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह की घटनाओं के बाद सरकार दवाओं की सोर्सिंग और डिस्ट्रीब्यूशन प्रोटोकॉल में बड़े बदलाव कर सकती है। भविष्य में फार्मा कंपनियों को अब सरकारी टेंडर प्रक्रिया में और अधिक कड़े क्वालिटी चेक का सामना करना पड़ सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल, अस्पताल में भर्ती बाकी मरीजों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है और वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं। बाजार और निवेशकों की नजरें अब फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट ही तय करेगी कि क्या यह एक मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट था या फिर कोई अन्य मेडिकल कारण।
