पुणे स्थित स्टार्टअप Ahammune Biosciences ने अपनी विटिलिगो दवा 'AB1001' के लिए फेज़-2 क्लिनिकल ट्रायल की शुरुआत कर दी है। फेज़-1 के सफल सुरक्षा परीक्षणों के बाद कंपनी इसे एक सुरक्षित और प्रभावी इलाज के रूप में पेश करने की तैयारी में है।
दवा का नया तरीका (Novel Approach)
विटिलिगो एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम स्किन के मेलानिन-प्रोड्यूसिंग सेल्स पर हमला कर देता है, जिससे त्वचा का रंग उड़ने लगता है। वर्तमान में जो इलाज उपलब्ध हैं, जैसे कि स्टेरॉयड या JAK इनहिबिटर्स, वे इम्यून सिस्टम को दबाने (Suppress) का काम करते हैं, जिससे संक्रमण और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बना रहता है। वहीं, Ahammune की AB1001 एक 'फर्स्ट-इन-क्लास' मॉलिक्यूल है, जो इम्यून रिस्पॉन्स शुरू होने से पहले ही उन संकेतों को रोकता है जो बीमारी को ट्रिगर करते हैं।
फंडिंग और स्ट्रैटेजी
कंपनी ने अब तक लगभग $8 मिलियन से $9 मिलियन की फंडिंग जुटाई है। बड़े फार्मा प्लेयर्स के मुकाबले, Ahammune ने बहुत ही कम संसाधनों में क्लिनिकल ट्रायल के इस अहम पड़ाव तक पहुंच हासिल की है। कंपनी फिलहाल दवा के क्रीम (Topical) और ओरल वर्जन, दोनों पर रिसर्च कर रही है।
मार्केट और चुनौतियां
भारतीय बाजार में फिलहाल सस्ते जेनेरिक स्टेरॉयड मौजूद हैं, जो असरदार नहीं हैं, या फिर महंगे आयातित JAK इनहिबिटर्स उपलब्ध हैं। कंपनी का लक्ष्य भारत में इसे किफायती दाम पर उपलब्ध कराना और साथ ही अमेरिका और यूरोप के बाजारों के लिए इंटरनेशनल पार्टनरशिप तलाशना है। हालांकि, ड्रग डेवलपमेंट में फेज़-2 की चुनौती काफी बड़ी होती है, क्योंकि यहां दवा का असर प्लेसबो (Placebo) के मुकाबले साबित करना होता है। निवेशकों की नजर अब इस ट्रायल के नतीजों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि दवा फेज़-3 तक पहुंच पाएगी या नहीं।
