पेटेंट एक्सपायरी का उठाया फायदा: मार्केट में एंट्री की बड़ी रणनीति
Abbott और Novo Nordisk India का यह गठबंधन Extensior को भारत के बड़े और बढ़ते डायबिटीज बाजार में उतारने का एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इसके जरिए Abbott, Ozempic और Wegovy जैसी ग्लोबल दवाओं में इस्तेमाल होने वाले सेमाग्लूटाइड मॉलिक्यूल के कमर्शियल राइट्स हासिल कर देश के डायबिटीज केयर सिस्टम में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। यह कदम इसलिए भी खास है क्योंकि भारत में सेमाग्लूटाइड का पेटेंट 20 मार्च, 2026 को खत्म हो रहा है। उम्मीद है कि यह नई थेरेपी मौजूदा प्रीमियम ब्रांड्स, जिनकी कीमत हर महीने ₹10,000 से ₹12,000 तक जा सकती है, की तुलना में ज्यादा किफायती होगी।
भारत में डायबिटीज का संकट: बड़े अवसर की तलाश
भारत डायबिटीज के मामले में दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है, जहां 101 मिलियन से ज्यादा वयस्क इस बीमारी से पीड़ित हैं। अनुमान है कि 2050 तक यह आंकड़ा 150 मिलियन तक पहुंच सकता है। डायबिटीज से जुड़े इलाज पर देश सालाना अरबों रुपये खर्च करता है, और यह खर्च और बढ़ेगा। चिंता की बात यह है कि लगभग 43% डायबिटीज मरीजों को अपनी बीमारी का पता ही नहीं है, जो समय पर और असरदार इलाज की जरूरत को दर्शाता है। यह गठबंधन GLP-1 एगोनिस्ट जैसी एडवांस्ड थेरेपी तक पहुंच बढ़ाने का लक्ष्य रखता है, जो टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल करने, वजन घटाने और दिल व किडनी से जुड़े जोखिमों को कम करने में कारगर साबित हुई हैं। भारत में GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और 2033 तक इसके USD 730.8 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 19.1% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखी जा रही है।
जेनेरिक दवाओं का हमला: बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
पेटेंट खत्म होने का इंतजार सिर्फ अवसर ही नहीं, बल्कि तगड़ी प्रतिस्पर्धा भी लेकर आ रहा है। Sun Pharma, Zydus Lifesciences, Dr. Reddy's Laboratories और Natco Pharma जैसी कम से कम आधा दर्जन बड़ी भारतीय फार्मा कंपनियां 21 मार्च, 2026 के बाद जेनेरिक सेमाग्लूटाइड वर्जन लॉन्च करने की तैयारी में हैं। माना जा रहा है कि इससे कीमतों में भारी गिरावट आएगी, संभवतः इलाज का खर्च 90% तक कम हो जाएगा, और जेनेरिक सेमाग्लूटाइड की शुरुआती डोज हर महीने लगभग ₹3,500 से ₹4,000 में उपलब्ध हो सकेगी। ऐसे में, Abbott और Novo Nordisk का गठबंधन भले ही अपनी स्थापित असरदारिता का लाभ उठा सके, लेकिन जेनेरिक दवाओं की कीमतों और तेजी से बाजार में पैठ बनाने की क्षमता एक बड़ी चुनौती पेश करेगी।
निवेशकों की राय: मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस बड़ी साझेदारी और बाजार की संभावनाओं के बावजूद, कुछ विश्लेषकों की नजर में Abbott India के शेयर्स के लिए आगे का रास्ता थोड़ा सतर्कता भरा है। हालांकि Abbott India के पास अच्छी क्वालिटी और मुनाफे की स्थिति है, लेकिन इसका वैल्यूएशन काफी महंगा माना जा रहा है। यह स्टॉक लगभग 14 के प्राइस-टू-बुक रेशियो और करीब 30.86 के P/E रेशियो पर ट्रेड कर रहा है। MarketsMojo ने इसे 'Sell' रेटिंग दी है। वहीं, Novo Nordisk (NVO) का P/E रेशियो लगभग 10.37 है। कंपनी को वैश्विक प्रतिस्पर्धा और कुछ ट्रायल्स के नतीजों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, और विश्लेषकों की राय भी मिली-जुली है, जिसमें 'Hold' रेटिंग के साथ कुछ टारगेट प्राइस में तेजी की उम्मीद जताई गई है।
