दमदार नतीजे और रिकॉर्ड डिविडेंड का ऐलान
Abbott India ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए अपने नतीजे जारी किए हैं, जो उम्मीद से बेहतर रहे। पिछले साल की तुलना में कंपनी का रेवेन्यू 8.1% की बढ़ोतरी के साथ ₹6,929.05 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, नेट प्रॉफिट 9.7% बढ़कर ₹1,552.02 करोड़ दर्ज किया गया। तिमाही नतीजों की बात करें तो चौथे क्वार्टर में भी रेवेन्यू 6.5% और प्रॉफिट 7.6% बढ़ा है।
इन बेहतरीन नतीजों के चलते कंपनी के बोर्ड ने ₹656 प्रति शेयर के डिविडेंड की सिफारिश की है। इसमें ₹525 का फाइनल डिविडेंड और ₹131 का स्पेशल डिविडेंड शामिल है। यह डिविडेंड पिछले फाइनेंशियल ईयर में दिए गए ₹475 प्रति शेयर के मुकाबले सबसे बड़ा है, जो शेयरधारकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है।
बाजार की विपरीत प्रतिक्रिया: क्यों गिरा शेयर?
मंगलवार, 12 मई 2026 को, इन शानदार नतीजों और रिकॉर्ड डिविडेंड के ऐलान के बावजूद Abbott India के शेयर में 2% की गिरावट देखी गई और यह ₹27,240.00 पर बंद हुआ। यह गिरावट तब आई जब पूरा बाजार भी दबाव में था और Nifty 50 इंडेक्स 0.85% नीचे था। शेयर की यह गिरावट दर्शाती है कि निवेशक शायद सिर्फ नतीजों से आगे देख रहे हैं या फिर मुनाफावसूली कर रहे हैं।
वैल्यूएशन और पियर कंपेरिजन
Abbott India का पिछले 12 महीनों का P/E रेश्यो (TTM P/E) लगभग 37.08 है, जो भारतीय फार्मा इंडस्ट्री के औसत P/E 34.5 से थोड़ा ज्यादा है। अगर इसके मुख्य प्रतिस्पर्धियों की बात करें, तो Dr. Reddy's Laboratories (लगभग 17.5) और Cipla (लगभग 23.5) की तुलना में Abbott India का P/E अधिक है। हालांकि, Sun Pharmaceutical Industries का P/E लगभग 40.9 है, जो कि Abbott India के P/E के आसपास ही है। Nifty Pharma इंडेक्स पिछले एक साल में 13-14% की CAGR से बढ़ा है।
Abbott India का डिविडेंड यील्ड करीब 1.78% है, जो इंडस्ट्री के औसत 0.8% से काफी बेहतर है। यह शेयरधारकों को वैल्यू लौटाने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दिखाता है। कंपनी ने पिछले सालों में भी लगातार डिविडेंड बढ़ाया है, जैसे FY25 में ₹475 और FY24 में ₹410।
ग्रोथ पर चिंताएं और भविष्य की राह
कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी और डिविडेंड भुगतान भले ही मजबूत हों, लेकिन पिछले पांच सालों में Abbott India की सेल्स ग्रोथ थोड़ी धीमी रही है, जो औसतन 9.96% रही है। कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है और ROE व ROCE जैसे मेट्रिक्स भी मजबूत हैं (लगभग 34.5% और 44.9%)।
हालांकि, ~37.08 का बढ़ा हुआ P/E रेश्यो यह बताता है कि बाजार पहले से ही कंपनी के भविष्य की ग्रोथ को उसके शेयर प्राइस में शामिल कर चुका है। ऐसे में, नतीजों के दिन 2% की गिरावट यह संकेत दे सकती है कि बाजार धीमी भविष्य की ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है या ऐसी कंपनी के लिए प्रीमियम चुकाने में हिचकिचा रहा है जिसकी सेल्स ग्रोथ उसकी प्रॉफिटेबिलिटी और डिविडेंड स्ट्रैटेजी की तुलना में कम रही है।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि डिविडेंड भुगतान अक्सर कैश जनरेशन से ज्यादा रहा है। इसलिए, भविष्य में इस तरह के ऊंचे डिविडेंड भुगतान की स्थिरता बनाए रखने के लिए कंपनी के कैश फ्लो पर नजर रखना जरूरी होगा।
विश्लेषकों का भरोसा और निवेशकों के लिए आकर्षण
विश्लेषकों का Abbott India के प्रति नजरिया अभी भी काफी हद तक पॉजिटिव है, और ज्यादातर 'Buy' रेटिंग की सलाह दे रहे हैं। अनुमान है कि अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए औसत 1-साल का प्राइस टारगेट ₹32,000 से ₹35,000 के बीच रहेगा।
आगामी फाइनेंशियल ईयर के लिए प्रति शेयर आय (EPS) का अनुमान लगभग ₹732.55 है, जो FY26 के वास्तविक EPS ₹730.36 के काफी करीब है। यह स्थिर आय का संकेत देता है।
लगातार मजबूत कमाई का अनुमान और शानदार डिविडेंड भुगतान उन निवेशकों को आकर्षित कर सकता है जो नियमित आय की तलाश में हैं। हालांकि, बाजार की तात्कालिक प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि शेयर को उसके वर्तमान वैल्यूएशन पर बनाए रखने और आगे बढ़ने के लिए निरंतर ग्रोथ के रास्ते खोजने होंगे।
