📊 नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
Aarti Pharmalabs Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तिमाही (Q3 FY26) के लिए अपने स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही के ₹70.72 करोड़ के मुकाबले बढ़कर ₹255.28 करोड़ पर पहुंच गया, जो कि 261% की जबरदस्त ग्रोथ दर्शाता है। नेट प्रॉफिट में भी 41.8% का इजाफा हुआ और यह ₹43.84 करोड़ रहा।
मगर, टॉप-लाइन (Top-line) ग्रोथ के साथ-साथ प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) पर बड़ा असर पड़ा है। कंपनी के स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट मार्जिन में भारी गिरावट आई है, जो पिछले साल की 43.72% की तुलना में घटकर सिर्फ 17.17% रह गया है।
9 महीने की अवधि (Nine-month period) के स्टैंडअलोन नतीजों पर नजर डालें तो, रेवेन्यू में 1.9% की मामूली गिरावट आई है और यह ₹1217.85 करोड़ रहा। वहीं, नेट प्रॉफिट में 25.2% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह ₹125.99 करोड़ रहा। बेसिक अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹18.59 से घटकर ₹13.89 पर आ गया।
कंसॉलिडेटेड (Consolidated) नतीजों की बात करें तो, Q3 FY26 में रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स में 19.86% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹205.57 करोड़ रहा। नेट प्रॉफिट में मामूली 2.84% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹27.92 करोड़ रहा, जबकि मार्जिन 13.58% पर रहा।
9 महीने की कंसॉलिडेटेड अवधि में रेवेन्यू 10.36% बढ़कर ₹590.50 करोड़ रहा और नेट प्रॉफिट में 50.8% की तगड़ी उछाल के साथ यह ₹272.40 करोड़ दर्ज किया गया। हालांकि, यह एक बड़ा विरोधाभास है कि भारी प्रॉफिट ग्रोथ के बावजूद, 9 महीने की कंसॉलिडेटेड ईपीएस (EPS) में 29.9% की गिरावट आई है और यह ₹20.31 से घटकर ₹13.84 रह गई है।
🤔 चिंता की बातें और मुख्य फैक्टर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिमाही के अंत में ₹49.35 करोड़ के गुड्स इन ट्रांजिट (Goods in Transit) यानी रास्ते में पड़े माल की वजह से स्टैंडअलोन रेवेन्यू पर असर पड़ा है। इसका मतलब है कि रिपोर्ट किए गए रेवेन्यू से असली सेल्स एक्टिविटी ज्यादा हो सकती है, लेकिन यह सेल्स साइकिल टाइमिंग और इन्वेंट्री मैनेजमेंट पर भी सवाल खड़े करता है।
इसके अलावा, स्टैंडअलोन मार्जिन में आई बड़ी गिरावट और कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट ग्रोथ के बावजूद ईपीएस में आई भारी कमी निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। कंपनी की ओर से मैनेजमेंट की ओर से कोई फॉरवर्ड-लुकिंग गाइडेंस (Forward-looking guidance) या कमेंट्री नहीं दी गई है, जिससे भविष्य की संभावनाओं का अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है।
निवेशकों की नजर अब अगले क्वार्टर (Q4 FY26) के नतीजों पर रहेगी, ताकि स्टैंडअलोन रेवेन्यू ग्रोथ की स्थिरता, गुड्स इन ट्रांजिट के असर और प्रॉफिट व ईपीएस के बीच के अंतर की वजहों को समझा जा सके।