📉 नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
बड़े नंबर:
कंपनी का कुल रेवेन्यू ₹602.9 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही (Q3 FY25) के ₹557.1 करोड़ के मुकाबले 8% ज्यादा है। वहीं, पिछले क्वार्टर (QoQ) की बात करें तो रेवेन्यू में 8% की गिरावट आई है। EBITDA में सालाना (YoY) 10% की कमी आई है और यह ₹56.3 करोड़ पर आ गया है। पिछली तिमाही (QoQ) के मुकाबले EBITDA में 33% की भारी गिरावट देखी गई। कंपनी का अर्निंग्स पर शेयर (EPS) Q3 FY26 में ₹4.44 रहा, जो पिछले साल के ₹4.22 से बेहतर है।
मुनाफे की क्वालिटी:
नेट प्रॉफिट (PAT) में 58% का दमदार इजाफा हुआ और यह ₹40.5 करोड़ पर पहुंच गया। लेकिन, इस PAT ग्रोथ के पीछे ऑपरेटिंग लेवल पर मार्जिन पर दबाव साफ दिख रहा है। EBITDA मार्जिन 190 बेसिस पॉइंट (bps) घटकर 9.3% रह गया, जो पिछले साल इसी तिमाही में 11.2% था। इसी तरह, पिछली तिमाही (QoQ) की तुलना में मार्जिन में 360 bps की बड़ी गिरावट आई। हालांकि, PAT मार्जिन 6.7% तक सुधर गया, जो पिछले साल 4.6% था। ऐसा संभवतः लोअर फाइनेंस कॉस्ट, टैक्स रेट में कमी या बेहतर प्रोडक्ट मिक्स के कारण हुआ है, जिसने ऑपरेटिंग दबाव के बावजूद नेट प्रॉफिट बढ़ाने में मदद की।
कंपनी का पक्ष (Management View):
कंपनी के CFO और COO, मिस्टर अधिश पाटिल ने EBITDA में आई इस गिरावट की वजह 'अस्थायी मार्केट डायनामिक्स' और 'नई सुविधाओं के कमीशनिंग की शुरुआती लागतों' को बताया। उन्होंने यह भी कहा कि जनवरी की सेल्स में अच्छी तेजी दिखी है और आने वाली तिमाहियों के लिए पॉजिटिव ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है। कंपनी ने यह भी बताया कि सयाखा में मिथाइल एमाइन्स के लिए बैकवर्ड इंटीग्रेशन प्लांट चालू हो गया है और तारपुर में सेलिसिलिक एसिड प्लांट का विस्तार हो रहा है, जिसके डाउनस्ट्रीम इंप्लीमेंटेशन पर काम चल रहा है। मैनेजमेंट का मानना है कि कंपनी एक 'इंफ्लेक्शन पॉइंट' पर है, जहाँ स्टेबल प्राइसेस और वॉल्यूम में तेजी आ रही है। कंपनी का पूरा फोकस ऑपरेशनल एफिशिएंसी, मार्जिन सुधार और कैपेसिटी बढ़ाने पर है।