ARISTION का बड़ा दांव: ₹1,900 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए P-Cure के साथ साझेदारी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
ARISTION का बड़ा दांव: ₹1,900 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए P-Cure के साथ साझेदारी

ARISTION Proton Center भारत में प्रोटोन थेरेपी सेंटर्स का नेटवर्क खड़ा करने के लिए **₹1,900 करोड़** का भारी निवेश करेगा। इसके लिए कंपनी इजराइल की P-Cure की 'कॉम्पैक्ट टेक्नोलॉजी' का इस्तेमाल करेगी, जिसका पहला सेंटर बेंगलुरु में खुलेगा।

ARISTION Proton Center Private Limited ने पूरे भारत में प्रोटोन थेरेपी सुविधाओं का एक विस्तृत नेटवर्क विकसित करने का ऐलान किया है। यह प्रोजेक्ट इजराइल की मेडिकल टेक्नोलॉजी फर्म P-Cure Ltd के सहयोग से शुरू किया जाएगा, जो अपनी खास 'सिंक्रोट्रॉन-बेस्ड' (synchrotron-based) तकनीक के लिए जानी जाती है।

इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत में कटौती

प्रोटोन थेरेपी को अब तक एक महंगा और विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर वाला इलाज माना जाता था, लेकिन इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य इसी सोच को बदलना है। P-Cure की 'अल्ट्रा-कॉम्पैक्ट' सिस्टम का इस्तेमाल करके ARISTION जमीन की जरूरत और शुरुआती कैपिटल खर्च को कम करना चाहती है। इससे कैंसर के इस एडवांस इलाज को अधिक सुलभ बनाने में मदद मिलेगी।

बेंगलुरु से होगी शुरुआत

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का पहला पड़ाव बेंगलुरु की 'Sentient Health City' होगी, जो कंपनी के ऑपरेटिंग मॉडल के लिए एक टेस्टिंग ग्राउंड की तरह काम करेगी। बेंगलुरु के बाद, कोच्चि को दूसरे केंद्र के रूप में चुना गया है और तीसरी लोकेशन की योजना भी पाइपलाइन में है। कंपनी ट्रीटमेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को जोड़कर ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने की तैयारी में है।

निवेशकों के लिए चुनौतियां

हालांकि यह प्रोजेक्ट भविष्य की दृष्टि से बड़ा है, लेकिन ₹1,900 करोड़ के इस इंफ्रास्ट्रक्चर को धरातल पर उतारना आसान नहीं होगा। इसमें रेग्युलेटरी अप्रूवल, निर्माण का लंबा समय और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भर्ती जैसी कई बड़ी चुनौतियां शामिल हैं।

इतना ही नहीं, प्रोटोन थेरेपी एक प्रीमियम सेवा है, जिसकी लागत पारंपरिक रेडिएशन की तुलना में काफी ज्यादा है। ऐसे में बिजनेस मॉडल की कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी पर्याप्त संख्या में मरीजों को आकर्षित कर पाती है या नहीं। कोच्चि सेंटर के लिए कंपनी अभी 'जॉइंट वेंचर' पार्टनर की तलाश में है, जो बताता है कि आगे के विस्तार के लिए बाहरी फंडिंग या पार्टनरशिप बहुत जरूरी होगी। बाजार की नजरें अब बेंगलुरु यूनिट के काम शुरू करने की टाइमलाइन पर टिकी हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.