भारत में लगभग आधे डॉक्टर अब रोज़ाना AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन 69% को 2030 तक अपनी नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता है। AI का इस्तेमाल बढ़ तो रहा है, पर ट्रेनिंग और सरकारी नियमों में बड़ी कमी है, जो हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के लिए AI को अपनाना मुश्किल बना रही है।
Detailed Coverage
भारतीय हेल्थकेयर में AI का बढ़ता दखल
भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब 48% डॉक्टर और हेल्थकेयर प्रोफेशनल अपनी प्रैक्टिस में AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह पिछले साल के 26% के मुकाबले एक बड़ी बढ़ोतरी है। हालांकि, इस नई तकनीक को अपनाने में मेडिकल प्रोफेशनल्स के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया दिख रही है, वे बेहतर पेशेंट आउटकम चाहते हैं, लेकिन अपनी नौकरियों के भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं।
AI के इस्तेमाल का तरीका और डॉक्टरों का भरोसा
फिलहाल, AI का इस्तेमाल खासतौर पर या सामान्य तौर पर हो रहा है। 34% यूज़र्स अक्सर हेल्थकेयर-स्पेसिफिक AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 56% अभी भी अपने रोजमर्रा के काम के लिए जनरल AI प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर हैं। इन सिस्टम्स पर भरोसा ज्यादातर मध्यम से उच्च स्तर का है। 35% क्लीनीशियन AI से मिली जानकारी पर पूरा भरोसा करते हैं, और 57% मध्यम भरोसा जताते हैं। इससे पता चलता है कि डॉक्टर AI को एक सहायक के तौर पर इस्तेमाल करने में सहज तो हो रहे हैं, लेकिन अहम फैसलों के लिए इसकी विश्वसनीयता को लेकर वे अभी भी सतर्क हैं।
ट्रेनिंग और गवर्नेंस की कमी
अस्पतालों और क्लीनिकों में AI को व्यापक रूप से अपनाने में एक बड़ी बाधा इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग की कमी है। सर्वे में शामिल केवल 45% हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को AI की पर्याप्त ट्रेनिंग मिली है। यह समस्या डॉक्टरों के लिए ज़्यादा गंभीर है, क्योंकि सिर्फ 18% डॉक्टरों को ही इन सिस्टम्स का उपयोग करने की सही ट्रेनिंग मिली है, जबकि 46% नर्सेज को ट्रेनिंग मिली है। इसके अलावा, 27% डॉक्टरों को लगता है कि उनके कार्यस्थल पर AI के इस्तेमाल के लिए मजबूत नियम और नीतियां (गवर्नेंस) हैं, जो यह दर्शाता है कि कई हेल्थकेयर ऑर्गेनाइजेशन अभी भी AI के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए फ्रेमवर्क बनाने के शुरुआती दौर में हैं।
भविष्य का नज़रिया और सेक्टर की चुनौतियां
साल 2030 को देखते हुए, AI को लेकर राय बंटी हुई है - कुछ इसके फायदे देख रहे हैं, तो कुछ पेशेवर जोखिमों को लेकर चिंतित हैं। लगभग 80% हेल्थकेयर प्रोफेशनल मानते हैं कि AI हेल्थकेयर डिलीवरी में एक ज़रूरी साथी बनेगा, जिससे पेशेंट मैनेजमेंट और कंसल्टेशन की क्वालिटी बेहतर होगी। लेकिन, इस उम्मीद के साथ ही 69% प्रैक्टिशनर्स को डर है कि AI ऑटोमेशन की वजह से अगले पांच सालों में उनकी नौकरियां जा सकती हैं।
निवेशकों और सेक्टर पर नज़र रखने वालों के लिए, यह देखना अहम होगा कि हेल्थकेयर इंस्टीट्यूशन्स ट्रेनिंग की कमी को कैसे पूरा करते हैं और क्या वे स्पष्ट नैतिक नीतियां बना पाते हैं। अगर इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो AI को अपनाने की रफ्तार धीमी हो सकती है या क्लीनिकों में ऑपरेशनल गलतियां हो सकती हैं। इंडस्ट्री का अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि अस्पताल कितनी जल्दी स्पेशलाइज्ड AI ट्रेनिंग प्रोग्राम में निवेश करते हैं और वे मानव-आधारित से AI-सहायता प्राप्त देखभाल में बदलाव को प्रबंधित करने के लिए मानकीकृत गवर्नेंस को कितनी सफलतापूर्वक लागू कर पाते हैं।
