SBI Card: छोटे शहरों में क्रेडिट कार्ड का बोलबाला! UPI से जुड़ने से हुआ बड़ा धमाका

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AuthorMehul Desai|Published at:
SBI Card: छोटे शहरों में क्रेडिट कार्ड का बोलबाला! UPI से जुड़ने से हुआ बड़ा धमाका
Overview

भारत के छोटे शहरों में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ती आय और डिजिटल जागरूकता के साथ, RuPay क्रेडिट कार्ड का UPI से जुड़ना एक बड़ा कारण बना है। SBI Card ने ग्राहकों की संख्या और खर्च, दोनों में भारी वृद्धि दर्ज की है, जो क्रेडिट के सक्रिय इस्तेमाल की ओर बड़ा कदम दिखाता है।

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भारत के छोटे शहरों में क्रेडिट कार्ड का बढ़ा चलन

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भारत के छोटे शहरों में तेज़ी से फैल रहा है, जो कंज्यूमर फाइनेंस में एक बड़ा बदलाव दिखा रहा है। इस ग्रोथ के पीछे बढ़ती आय और डिजिटल पेमेंट्स की बढ़ती जानकारी है। RuPay क्रेडिट कार्ड को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के साथ जोड़ने से इसमें तेज़ी आई है, जिससे टियर 2 और टियर 3 शहरों के ग्राहक रोज़मर्रा की खरीदारी के लिए आसानी से क्रेडिट का इस्तेमाल कर पा रहे हैं। SBI Card के ताज़ा आंकड़े एक्टिव कार्ड्स की संख्या और ट्रांज़ैक्शन वैल्यू, दोनों में बड़ी बढ़ोतरी दिखा रहे हैं, जो ग्राहकों को सिर्फ कार्ड देने से आगे बढ़कर क्रेडिट के सक्रिय इस्तेमाल का संकेत है।

उभरते शहरों में डिजिटल क्रेडिट की मांग

SBI Card के आंकड़े बताते हैं कि इन बढ़ते शहरी इलाकों में UPI-लिंक्ड क्रेडिट कार्ड की ज़बरदस्त डिमांड है। ख़ास बात यह है कि UPI के साथ क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले 77% ग्राहक और इस चैनल से होने वाले लगभग 81% खर्च टियर 2 और टियर 3 शहरों से आते हैं। यह बड़े मेट्रो शहरों के बाहर फाइनेंशियल इन्क्लूज़न में क्रेडिट कार्ड की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। भारतीय क्रेडिट कार्ड मार्केट में कंज्यूमर डिमांड और फाइनेंशियल इन्क्लूज़न की कोशिशों से लगातार ग्रोथ की उम्मीद है।

सक्रिय खर्च की ओर झुकाव

फाइनेंशियल ईयर 26 तक अनुमानित 11.86 करोड़ क्रेडिट कार्ड्स के सर्कुलेशन के साथ, भारत का क्रेडिट कार्ड मार्केट ज़्यादा इस्तेमाल की ओर बढ़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 26 में कुल रिटेल खर्च ₹3.54 ट्रिलियन से ज़्यादा रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 15% ज़्यादा है। ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन्स अब भी सबसे आगे हैं, जो रिटेल खर्च का लगभग 62.5% है। यह पेमेंट टेक्नोलॉजी और सरकारी डिजिटल फाइनेंस पहलों से समर्थित, कई कैटेगरीज में डिजिटल खर्च की ओर व्यापक बदलाव को दिखाता है।

बदलती कंज्यूमर आदतें

SBI Card के MD & CEO, सलीला पांडे, बढ़ती आय, इच्छाओं, सहायक नीतियों और डिजिटलीकरण को इस ग्रोथ का मुख्य कारण बताती हैं। ग्राहक लाइफस्टाइल और एक्सपीरियंस-बेस्ड खरीदारी पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं, और रोज़मर्रा के ट्रांज़ैक्शन्स की सुविधा को महत्व दे रहे हैं। SBI Card इन बदलती मांगों को पूरा करने के लिए पार्टनरशिप और इनोवेशन के ज़रिए अपनी पेशकशों को बेहतर बना रहा है। कंपनी ने Q4 FY26 के लिए ₹609 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 14% ज़्यादा है, और कुल आय 7% बढ़कर ₹5,187 करोड़ हो गई। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, नेट प्रॉफिट 13% से ज़्यादा बढ़कर ₹2,167 करोड़ हो गया।

EMI में बढ़ोतरी और खर्च का विस्तार

SBI Card ने फाइनेंशियल ईयर 26 के दौरान EMI ट्रांज़ैक्शन्स में ज़बरदस्त डबल-डिजिट ग्रोथ देखी, क्योंकि ग्राहकों ने गैजेट्स और ड्यूरेबल्स के लिए इंस्टॉलमेंट ऑप्शन का इस्तेमाल किया। बड़ी कीमत वाली चीज़ों के पेमेंट को किश्तों में बांटने का यह ट्रेंड अब छोटे शहरों तक भी पहुंच रहा है। ग्राहक ट्रैवल, वेलनेस और डिजिटल खर्च जैसी कैटेगरीज में फायदे के लिए स्ट्रेटेजिकली कई क्रेडिट कार्ड्स का इस्तेमाल भी कर रहे हैं, और पर्सनलाइज़्ड रिवॉर्ड्स व एक्सपीरियंस-फोकस्ड उपयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं।

मार्केट शिफ्ट का विश्लेषण

RuPay को UPI के साथ इंटीग्रेट करने से रोज़मर्रा के, कम वैल्यू वाले ट्रांज़ैक्शन्स के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। इसने कॉम्पिटिशन को बढ़ाया है, जिससे UPI के इस्तेमाल की वजह से 2025 के अंत तक वॉल्यूम के हिसाब से RuPay की क्रेडिट कार्ड मार्केट में हिस्सेदारी अनुमानित 16-18% तक बढ़ गई है। SBI Card की मार्केट में अच्छी हिस्सेदारी है, और राष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड खर्च बाज़ार का लगभग पांचवां हिस्सा है। मई 2026 तक, SBI Card का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग 6.50 बिलियन डॉलर था, जिसका P/E रेश्यो लगभग 29.7 था। इसके प्रमुख कॉम्पिटिटर्स में HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank शामिल हैं।

संभावित चुनौतियां

ग्रोथ के बावजूद, कुछ मुश्किलें भी हैं। हाई प्रोविज़न्स फॉर क्रेडिट लॉसेस और बढ़ते ऑपरेटिंग कॉस्ट की वजह से Q1 FY26 के लिए SBI Card का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 6% गिरा। कंपनी का क्रेडिट कॉस्ट Q1 FY26 में बढ़कर 9.6% हो गया, और इसका कॉस्ट-टू-इनकम रेश्यो Q3 FY26 में 56.8% हो गया। हालांकि Q4 FY26 तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) गिरकर 2.41% होने से एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ, फिर भी आर्थिक अस्थिरता या बढ़ती ब्याज दरें एसेट क्वालिटी और प्रॉफिटेबिलिटी को चुनौती दे सकती हैं। एनालिस्ट्स की राय मिली-जुली है, जिसमें SBI Cards के लिए 7 बाय, 11 सेल, और 7 होल्ड की सिफ़ारिशें हैं।

भविष्य की संभावनाएं

एनालिस्ट्स का SBI Cards के लिए औसतन 12 महीने का प्राइस टारगेट लगभग ₹742.25 INR है, जो संभावित अपसाइड का संकेत देता है। डिजिटल पेमेंट को अपनाने, कंज्यूमर क्रेडिट की मांग और फाइनेंशियल इन्क्लूज़न पहलों से भारतीय क्रेडिट कार्ड मार्केट के विस्तार जारी रहने की उम्मीद है। UPI-एनेबल्ड क्रेडिट कार्ड्स जैसे इनोवेशन और आगे यूजर सेगमेंटेशन से मार्केट को आकार मिलने की संभावना है। SBI Card का डिजिटल ऑनबोर्डिंग और स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप पर फोकस इसके लगातार विकास को सपोर्ट करेगा।

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