Zero-Emission Vehicles: भारत में 2050 तक 17 लाख जानें बचा सकती हैं इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Zero-Emission Vehicles: भारत में 2050 तक 17 लाख जानें बचा सकती हैं इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ!

एक नई रिसर्च स्टडी के मुताबिक, अगर भारत 2045 तक जीरो-एमिशन व्हीकल्स (ZEVs) की तरफ बढ़ता है, तो 2050 तक करीब **17 लाख** जानें बचाई जा सकती हैं। अभी सड़क परिवहन से होने वाला प्रदूषण हर साल **90,000** लोगों की मौत और **15,300** बच्चों में अस्थमा का कारण बन रहा है। ये आंकड़े भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ते कदम के बड़े पब्लिक हेल्थ फायदों को दर्शाते हैं।

2050 तक 17 लाख जिंदगियों को बचाएगी इलेक्ट्रिक क्रांति!

जीरो-एमिशन ट्रांसपोर्ट की ओर बढ़ने से अगले ढाई दशक में भारत में पब्लिक हेल्थ में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। रिसर्च बताती है कि अगर भारत 2045 तक नए व्हीकल की सभी बिक्री जीरो-एमिशन वाली कर लेता है, तो 2050 तक करीब 17 लाख लोगों की अकाल मृत्यु रोकी जा सकती है। यह कदम शहरी वायु प्रदूषण के एक बड़े स्रोत पर लगाम लगाएगा, जो वर्तमान में हर साल 90,000 मौतों और 15,000 से ज़्यादा बच्चों में अस्थमा का कारण बन रहा है।

सबसे ज़्यादा भीड़ वाले इलाकों पर असर

नेशनल कैपिटल रीजन (NCR), खासकर दिल्ली, ट्रैफिक से जुड़े प्रदूषण की सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहा है। देश की करीब 5% आबादी के बावजूद, NCR में 2024 में रोड ट्रांसपोर्ट से होने वाली कुल मौतों का 9% और बच्चों में नए अस्थमा के मामलों का 23% हिस्सा था। NCR के कई इलाकों में, अकेले रोड व्हीकल्स से निकलने वाले नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का स्तर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की सभी प्रदूषण स्रोतों के लिए सालाना सुरक्षा गाइडलाइन को पार कर चुका है। इसके अलावा, 2024 में दिल्ली में ट्रांसपोर्ट से PM2.5 का जो स्तर दर्ज किया गया, वह WHO की सुरक्षित सीमा से दोगुने से भी ज़्यादा था।

भारी-भरकम गाड़ियों का रोल

भारत के व्हीकल फ्लीट की बनावट इन प्रदूषण स्तरों में बड़ी भूमिका निभाती है। हालांकि हैवी-ड्यूटी ट्रक्स और बसें कुल वाहनों में कम हिस्सेदारी रखती हैं, लेकिन वायु गुणवत्ता पर इनका असर बहुत ज़्यादा है। 2024 में, इन भारी गाड़ियों के कारण रोड ट्रांसपोर्ट सेक्टर से होने वाले कुल नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन का 79% और PM2.5 उत्सर्जन का 64% था। इसी वजह से, इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) के एक्सपर्ट्स का मानना है कि एग्जॉस्ट (tailpipe) से होने वाले उत्सर्जन को खत्म करने के लिए इलेक्ट्रीफिकेशन (electrification) सबसे असरदार रास्ता है। इस बदलाव की रणनीति में सिर्फ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ाना ही शामिल नहीं है; बल्कि पुराने, ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना और देश भर में सख्त ट्रांसपोर्ट नीतियां लागू करना भी ज़रूरी है ताकि इन लंबे समय के हेल्थ गोल्स को हासिल किया जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.