पश्चिम बंगाल सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए **4.38 लाख करोड़** का बजट पेश किया है। खास बात यह है कि इस बजट का **69%** हिस्सा सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) से जुड़ा है। सरकार सुंदरबन में सौर ऊर्जा और जलवायुresilience प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश करने की योजना बना रही है। हालांकि, थर्मल पावर पर जारी जोर-शोर ने पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह कदम रिन्यूएबल एनर्जी, ईपीसी (EPC) और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए नए अवसर खोल सकता है।
पश्चिम बंगाल का बड़ा ऐलान
पश्चिम बंगाल सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल 4.38 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। इस बजट की सबसे खास बात यह है कि कुल खर्च का 69%, यानी करीब 3.01 लाख करोड़ रुपये, संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) के साथ जोड़ा गया है। यह राज्य की वित्तीय नीतियों में ग्लोबल क्लाइमेट लक्ष्यों को शामिल करने की एक बड़ी पहल है, जिसे UN डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) का भी सहयोग मिल रहा है।
रिन्यूएबल एनर्जी और ईपीसी (EPC) के लिए अवसर
बजट का एक बड़ा हिस्सा ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) पर केंद्रित है। राज्य में बिजली की मांग 2035 तक 27 GW तक पहुंचने का अनुमान है। इसे पूरा करने के लिए, सरकार सौर ऊर्जा की ओर रुख कर रही है। बकरेेश्वर डैम (Bakreshwar Dam) में 2,000 करोड़ रुपये की लागत से फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक प्रोजेक्ट (Floating Solar Photovoltaic Initiative) की योजना है।
निवेशकों के लिए, यह इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) स्पेस की कंपनियों और रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण निर्माताओं के लिए एक बड़ा अवसर है। इसके अलावा, सरकार 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' (PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana) के तहत 2 लाख रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का लक्ष्य भी लेकर चल रही है, जिससे इस क्षेत्र में सौर इंस्टॉलर और कंपोनेंट सप्लायर की मांग बढ़ेगी।
सुंदरबन में इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च
बजट में सुंदरबन क्षेत्र के लिए भी खास फंड आवंटित किया गया है, जहां पारंपरिक ब्रिज कनेक्टिविटी की बजाय पारिस्थितिक स्थिरता (Ecological Stability) को प्राथमिकता दी जा रही है। यहां पोंटून जेट्टी (Pontoon Jetties) विकसित करने और कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाली नावों (Solar-operated Boats) को बढ़ावा देने की योजना है।
यह इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव, एशियाई विकास बैंक (ADB) और विश्व बैंक (World Bank) जैसे अंतरराष्ट्रीय निकायों द्वारा वित्त पोषित अपर और लोअर सुंदरबन डेल्टा प्रोजेक्ट्स (Upper and Lower Sundarbans Delta Projects) के साथ मिलकर, सिविल इंजीनियरिंग और विशेष इंफ्रा फर्मों के लिए सरकारी अनुबंधों का एक स्थिर प्रवाह सुनिश्चित करेगा। तटबंधों (Embankments) के पुनर्निर्माण में नेचर-बेस्ड टेक्नोलॉजीज (Nature-based Technologies) के उपयोग से भी विशेष ठेके का काम मिलने की उम्मीद है।
थर्मल पावर बनाम ग्रीन गोल्स
जहां बजट हरित पहलों पर जोर देता है, वहीं बेस-लोड बिजली की मांग को पूरा करने के लिए नए थर्मल पावर प्लांट के प्रावधान भी शामिल हैं। इस दोहरे रुख पर पर्यावरण विशेषज्ञों के बीच चर्चा शुरू हो गई है।
कुछ आलोचकों का कहना है कि राज्य के पर्यावरण विभाग के लिए सिर्फ 100 करोड़ रुपये का आवंटन, वायु और नदी प्रदूषण प्रबंधन के लिए अपर्याप्त हो सकता है। निवेशकों के लिए, यह ESG (Environmental, Social, and Governance) के नजरिए से देखने लायक है। पश्चिम बंगाल में बिजली क्षेत्र की कंपनियां, जैसे CESC, को बदलती नियामक मांगों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि राज्य पारंपरिक थर्मल पावर निर्भरता और नए जलवायु-लचीले जनादेश के बीच संतुलन बना रहा है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए
इस क्षेत्र में निवेश करने वाले निवेशकों को बकरेेश्वर डैम सोलर प्रोजेक्ट और सुंदरबन इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों से संबंधित टेंडरों (Tenders) पर नजर रखनी चाहिए। इन प्रोजेक्ट्स की एग्जीक्यूशन टाइमलाइन (Execution Timeline) निजी क्षेत्र के प्रतिभागियों के लिए ऑर्डर प्रवाह को मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना होगी। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल क्लाइमेट रेसिलिएंट फंड (West Bengal Climate Resilient Fund) और पश्चिम बंगाल क्लाइमेट फाइनेंस फैसिलिटी (West Bengal Climate Finance Facility) से जुड़े किसी भी अपडेट से पता चलेगा कि राज्य इन महत्वाकांक्षी स्थिरता लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए निजी पूंजी को कितनी प्रभावी ढंग से जुटा सकता है।
