कार्बन हटाने के ग्लोबल मिशन को मिलेगी नई ऊर्जा
Varaha के लिए यह $45 मिलियन की सीरीज बी फंडिंग एक बड़ा बूस्टर है, जिसका नेतृत्व WestBridge Capital ने किया है। यह फंड कंपनी की वैज्ञानिक मापन, रिपोर्टिंग और सत्यापन (MRV) क्षमताओं को बढ़ाने और अपने अभिनव औद्योगिक साझेदारी मॉडल, Varaha Industrial Partners Program (VIPP) को और मजबूत करने में मदद करेगा। यह निवेश उन कंपनियों के लिए एक बड़ा संकेत है जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं से कार्बन हटाने के समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने में रुचि रखती हैं, खासकर उन कंपनियों के लिए जो अपने नेट-जीरो लक्ष्यों को पूरा करना चाहती हैं। भारतीय क्लाइमेट टेक इकोसिस्टम में, जहां सीरीज बी और उससे आगे के फंडिंग राउंड कम देखने को मिलते हैं, Varaha का यह कदम महत्वपूर्ण है। कंपनी की रणनीति उभरते बाजारों में 1.5 से 3 गुना कम लागत पर कार्बन रिमूवल क्रेडिट्स प्रदान करना है, जो इसे पश्चिमी देशों के मुकाबले एक मजबूत प्रतिस्पर्धी बनाती है।
कैसे Varaha दुनिया भर में फैलाएगी अपना नेटवर्क?
Varaha की सबसे बड़ी ताकत उभरते बाजारों में काम करके किफायती कार्बन हटाने वाले क्रेडिट्स प्रदान करना है। यह उत्तरी अमेरिका और यूरोप की कंपनियों की तुलना में एक सस्ता विकल्प पेश करता है। इस नई फंडिंग का इस्तेमाल कंपनी अपनी भौगोलिक पहुंच को और बढ़ाने के लिए करेगी। वर्तमान में भारत, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और आइवरी कोस्ट में काम कर रही Varaha अब वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों में विस्तार करने की योजना बना रही है। यह विस्तार Google और Microsoft जैसे बड़े क्लाइंट्स की मांग को पूरा करने में मदद करेगा, जिनके साथ Varaha के पहले से ही कार्बन ऑफटेक एग्रीमेंट (offtake agreements) हैं। कंपनी इन टेक दिग्गजों को पहले भी महत्वपूर्ण कार्बन क्रेडिट्स बेच चुकी है।
Varaha की विस्तार योजना का एक मुख्य हिस्सा VIPP है। यह एक बायोचार-केंद्रित पहल है जिसका उद्देश्य उन औद्योगिक ऑपरेटरों को जोड़ना है जिनके पास बायोमास और गैसीफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर है। VIPP के माध्यम से, भागीदार Varaha की MRV प्रणालियों और कार्बन क्रेडिट बनाने की विशेषज्ञता का उपयोग करके सत्यापित कार्बन रिमूवल क्रेडिट्स उत्पन्न कर सकते हैं। यह प्रोग्राम पहले से ही सक्रिय है, जिसमें एग्रीबिजनेस, एक पश्चिम अफ्रीकी काजू कंपनी और एक भारतीय स्टील निर्माता जैसे भागीदार शामिल हैं जो डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। बायोचार कार्बन रिमूवल बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जिसके 2022 से 2024 के बीच 131.6% के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़कर 2024 में $181.5 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। इस वृद्धि का मुख्य कारण Microsoft और Google जैसी कंपनियों की बड़ी मांग है। हालांकि, बायोचार क्षेत्र को सप्लाई चेन की बाधाओं, क्षमता विस्तार के लिए पूंजी की आवश्यकता और MRV प्रक्रियाओं की जटिलताओं जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।
Varaha, जिसकी स्थापना 2022 में हुई थी, ने पहले भी फंडिंग जुटाई है। 2022 में $4 मिलियन का सीड राउंड और 2024 में $8.7 मिलियन का सीरीज ए राउंड। जनवरी 2026 तक, कंपनी का वैल्यूएशन लगभग ₹1,020 करोड़ (लगभग $122 मिलियन USD) था। निवेशकों का कहना है कि Varaha के पास एक उभरते हुए उद्योग में गहरी वैज्ञानिक विश्वसनीयता के साथ-साथ एक व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बिजनेस मॉडल भी है, जो इसे भारतीय क्लाइमेट टेक्नोलॉजी में एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण निवेश अवसर बनाता है। कंपनी के कार्बन रिमूवल पोर्टफोलियो में बायोचार, एफॉरेस्टेशन/रीफॉरेस्टेशन/रीवेजिटेशन (ARR), रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर और एन्हांस्ड रॉक वेदरिंग जैसे चार मुख्य रास्ते शामिल हैं। Varaha का लक्ष्य अपनी परिचालन दक्षता और वैज्ञानिक कठोरता का लाभ उठाकर खुद को एक प्रमुख ग्लोबल कार्बन रिमूवल प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करना है। निवेशकों का विश्वास, प्रमुख निगमों के साथ रणनीतिक ऑफटेक एग्रीमेंट्स से मजबूत हुआ है, जो Varaha के समाधानों के लिए स्पष्ट बाजार की भूख को दर्शाता है। हालांकि, कंपनी को कार्बन क्रेडिट बाजार की अंतर्निहित जटिलताओं, जिसमें विकसित हो रहे MRV मानक और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने की चुनौतियां शामिल हैं, से निपटना होगा ताकि इस फंडिंग को बड़े पैमाने पर स्थायी, प्रभावशाली कार्बन रिमूवल में बदला जा सके।
