यूक्रेन में जारी जंग का पर्यावरण पर गहरा असर पड़ रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध से अब तक **31.1 करोड़ टन** ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हुआ है। युद्ध के कारण **11,000** से अधिक बार पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
जंग ने पर्यावरण को पहुंचाया भारी नुकसान
यूक्रेन में चल रहे युद्ध ने पर्यावरण को अभूतपूर्व नुकसान पहुंचाया है। 'इनिशिएटिव ऑफ ग्रीनहाउस गैस अकाउंटिंग ऑफ वॉर' की एक रिपोर्ट बताती है कि युद्ध के कारण लगभग 31.1 करोड़ टन ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हुआ है। हालांकि, युद्ध की सक्रिय प्रकृति के कारण इन आंकड़ों की सटीक गणना मुश्किल है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि यह आधुनिक यूरोपीय इतिहास में सबसे बड़े पर्यावरणीय नुकसानों में से एक है।
11,000 से ज्यादा बार पर्यावरण को नुकसान
यूक्रेन सरकार के अधिकारियों ने युद्ध से सीधे तौर पर जुड़े पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के कम से कम 11,000 मामलों की पुष्टि की है। इनमें बड़े पैमाने पर औद्योगिक प्रदूषण, जंगल की आग, और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) के नष्ट होने से हवा, मिट्टी और पानी में खतरनाक सामग्री का रिसाव शामिल है।
इकोसाइड (Ecocide) पर कानूनी चुनौती
ये आंकड़े भले ही चौंकाने वाले हों, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून के सामने एक बड़ी चुनौती है: इकोसाइड (Ecocide) की कोई स्पष्ट, सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत परिभाषा का अभाव। इस कानूनी कमी के चलते सैन्य गतिविधियों के दीर्घकालिक पर्यावरणीय परिणामों के लिए पक्षों को जवाबदेह ठहराना मुश्किल हो जाता है।
सीमा पार भी असर और भविष्य के खतरे
युद्ध के पर्यावरणीय परिणाम यूक्रेन की सीमाओं से कहीं आगे तक फैले हुए हैं। वैज्ञानिक और पर्यावरण नीति विशेषज्ञ सीमा पार के प्रभावों को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि प्रदूषक और जलवायु-परिवर्तनकारी गैसें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर रही हैं। इस स्थिति ने युद्ध में पारिस्थितिकी के हथियार के रूप में इस्तेमाल होने की बहस को फिर से छेड़ दिया है, जिसके ऐतिहासिक उदाहरण हैं, जैसे कि वियतनाम युद्ध के दौरान रासायनिक डिफोलिएंट्स का उपयोग।
