अमेरिका की एक अपीली अदालत ने EPA की **$20 अरब** जलवायु अनुदान (climate grants) को वापस लेने की कोशिश को गैरकानूनी करार दिया है। यह फैसला सरकार के लिए एक कानूनी झटका है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में अपील की गुंजाइश को देखते हुए यह पैसा अभी भी फ्रीज है। इससे बड़े क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर अनिश्चितता बनी हुई है।
EPA के ₹20 अरब वापस लेने के फैसले पर कोर्ट का स्टे!
अमेरिका की डी.सी. सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि EPA का आठ गैर-लाभकारी संस्थाओं को दिए गए $20 अरब के अनुदान (grants) को खत्म करने और वापस लेने का प्रयास गैरकानूनी था। ये फंड 2022 के Inflation Reduction Act के तहत शुरू किए गए Greenhouse Gas Reduction Fund (GGRF) का हिस्सा थे, जिसका मकसद क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देना और जीवाश्म ईंधन से समुदायों के ट्रांजीशन में मदद करना था।
क्यों EPA का कदम था गैरकानूनी?
अदालत ने पाया कि EPA के पास केवल प्रशासनिक नीति में बदलाव के आधार पर अनुदानों को रद्द करने का कानूनी अधिकार नहीं है। जजों का मानना था कि एजेंसी ने Inflation Reduction Act के विधायी इरादे को सीधे तौर पर बदलने की कोशिश की, जिसे कानून का समर्थन प्राप्त नहीं था। इस फैसले के बाद, EPA द्वारा पैसे वापस लेने के प्रयासों पर लगी रोक प्रभावी रूप से बहाल हो गई है।
फंड अभी भी फ्रीज, आगे क्या?
हालांकि कानूनी जीत हासिल करने वाली संस्थाओं के लिए यह एक राहत भरी खबर है, लेकिन $20 अरब की यह रकम अभी भी बैंक खातों में फ्रीज है। कोर्ट ने अपने फैसले पर एक 'स्टे' (stay) दिया है, जिससे सरकार को कुछ दिनों का समय मिला है कि वह अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप के लिए याचिका दायर कर सके। नतीजतन, क्लीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर में इस पूंजी का असल निवेश रुका हुआ है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
वैश्विक क्लीन एनर्जी सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए यह स्थिति बड़े सरकारी फंडिंग प्रोग्राम्स से जुड़े महत्वपूर्ण रेगुलेटरी जोखिमों को उजागर करती है। 2025 की शुरुआत में शुरू हुई इस फ्रीज ने पहले ही गैर-लाभकारी संस्थाओं को बड़ा ऑपरेशनल नुकसान पहुंचाया है, जिसमें नेतृत्व परिवर्तन और कर्मचारियों की छंटनी की खबरें भी शामिल हैं। यह अस्थिरता रिन्यूएबल सेक्टर में नियोजित पूंजीगत खर्च को कैसे बाधित कर सकती है, इसे स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
जबकि सीधा प्रभाव अमेरिकी संस्थाओं पर केंद्रित है, GGRF के आसपास की अनिश्चितता इस बात की याद दिलाती है कि क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट पाइपलाइन राजनीतिक और नियामक बदलावों के प्रति कितनी संवेदनशील है। ऊर्जा संक्रमण (energy transition) की व्यापक तस्वीर को देखने वालों के लिए, मुख्य निगरानी बिंदु किसी भी संभावित सुप्रीम कोर्ट अपील का परिणाम होगा। कोई भी अंतिम समाधान—या जारी मुकदमेबाजी—यह तय करेगी कि ये अरबों डॉलर नई सोलर, बैटरी और ऊर्जा-कुशल परियोजनाओं को कब वित्तपोषित करने के लिए जारी किए जा सकेंगे, जो अक्सर वैश्विक स्तर पर क्लीन एनर्जी कंपोनेंट्स और टेक्नोलॉजी की मांग के रुझान को प्रभावित करते हैं।
