130 से ज्यादा नागरिक समूहों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से पेरिस समझौते के तहत जारी पहले कार्बन क्रेडिट को सस्पेंड करने की मांग की है। यह विवाद म्यांमार के एक 'कुकस्टोव प्रोजेक्ट' (PoA 10471) को लेकर खड़ा हुआ है, जिसमें धांधली और मिलिट्री शासन से संबंध होने की आशंका जताई गई है।
संयुक्त राष्ट्र के ग्लोबल कार्बन मार्केट की विश्वसनीयता पर अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। पेरिस समझौते के Article 6.4 मैकेनिज्म के तहत जारी किए गए पहले कार्बन क्रेडिट को रोकने के लिए 130 से अधिक सिविल सोसाइटी संगठनों का एक गठबंधन मैदान में उतर आया है। यह विवाद म्यांमार के एक क्लीन कुकिंग प्रोजेक्ट (PoA 10471) पर केंद्रित है, जिसे फरवरी 2026 में पहली बार इस नए ढांचे के तहत सर्टिफाई किया गया था।
दावों में क्या है सच?
आलोचकों का तर्क है कि इस प्रोजेक्ट का वैलिडेशन प्रोसेस पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण था। उनका दावा है कि इस प्रोजेक्ट के लिए जारी किए गए क्रेडिट्स असल में हुए कार्बन उत्सर्जन में कमी से कहीं ज्यादा हैं। 'ओवर-क्रेडिटिंग' के ये आरोप कार्बन मार्केट के मूल उद्देश्य पर चोट करते हैं, क्योंकि हर क्रेडिट का मतलब एक वास्तविक और सत्यापन योग्य उत्सर्जन कमी होना चाहिए। यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह Article 6.4 सिस्टम की बुनियाद को हिला सकता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कार्बन ट्रेडिंग के लिए 'गोल्ड स्टैंडर्ड' माना जा रहा था।
म्यांमार विवाद और रिस्क
इस मामले को और जटिल बनाते हैं म्यांमार के अस्थिर राजनीतिक हालात। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए सिर्फ 'रिमोट मेथड्स' और कुछ ऑनलाइन इंटरव्यू का सहारा लिया गया, जो कि पर्याप्त नहीं था। इसके अलावा, पारदर्शिता की कमी ने उन आशंकाओं को हवा दी है कि कहीं कार्बन क्रेडिट्स से मिलने वाला पैसा अप्रत्यक्ष रूप से मिलिट्री शासन के संस्थानों तक तो नहीं पहुंच रहा है।
बोन (Bonn) मीटिंग पर टिकीं नजरें
यह विरोध ऐसे समय पर हो रहा है जब 5 अक्टूबर से 9 अक्टूबर 2026 तक जर्मनी के बोन में Article 6.4 की सुपरवाइजरी बॉडी की 23वीं मीटिंग चल रही है। यह संस्था ग्लोबल कार्बन मार्केट के नियम तय करने के लिए जिम्मेदार है। अब दुनिया भर के निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या UN इस प्रोजेक्ट की स्वतंत्र जांच के आदेश देगा, या फिर स्थिति जस की तस बनी रहेगी। यह फैसला आने वाले समय में अनिश्चित राजनीतिक वाले देशों में कार्बन प्रोजेक्ट्स की मंजूरी के लिए एक नजीर (precedent) बन सकता है।
